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ग्वालियर अवैध खनन मामला: हाईकोर्ट ने 83 खदानों का रिकॉर्ड मांगा, पट्टों के नवीनीकरण में भारी अनियमितताएं

शुक्रवार को हाईकोर्ट की डबल बेंच ने इस मामले में सुनवाई करते हुए 83 खदानों का रिकॉर्ड तलब किया है। साफ तौर पर दिख रहा था लीज कहीं और की है और खनन कहीं और हुआ है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

17 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें
ग्वालियर अवैध खनन मामला: हाईकोर्ट ने 83 खदानों का रिकॉर्ड मांगा, पट्टों के नवीनीकरण में भारी अनियमितताएं
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ग्वालियर के बिलौआ और रफादपुर क्षेत्र में चल रहे अवैध खनन के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस गंभीर मुद्दे पर सुनवाई करते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की डबल बेंच ने राज्य सरकार से कुल 83 खदानों का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है। इनमें से 57 खदानें वर्तमान में संचालित हैं, जिन पर अब कानूनी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

फाइलों में न मैपिंग, न सीमांकन का ब्योरा

शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने जब रैंडम तरीके से किसी एक खदान के पट्टा नवीनीकरण (लीज रिन्युअल) की फाइल की जांच की, तो उसमें चौंकाने वाली खामियां पाई गईं। फाइल में न तो खदान की मैपिंग मौजूद थी और न ही सीमांकन का कोई उल्लेख था। कोर्ट ने पाया कि लीज किसी और स्थान के लिए आवंटित थी, जबकि खनन कार्य कहीं और किया जा रहा था। इस गंभीर लापरवाही पर अदालत ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की है।

अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जो फाइलें फिलहाल भोपाल मुख्यालय में रखी गई हैं, उन्हें भी अगली सुनवाई के दौरान अनिवार्य रूप से पेश किया जाए। यह पूरी कानूनी कार्रवाई वकील अकरम खान द्वारा दायर की गई एक याचिका के आधार पर आगे बढ़ रही है।

16 खदानों पर रोक और संचालकों को नोटिस

इससे पूर्व की सुनवाई में खनिज विभाग द्वारा पेश किए गए 16 खदानों के दस्तावेजों में भी भारी विसंगतियां सामने आई थीं। नियमों को ताक पर रखकर किए जा रहे खनन को देखते हुए हाईकोर्ट ने इन 16 खदान संचालकों को मामले में पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी किए हैं। इन संचालकों से अब इस पूरे घपले पर जवाब मांगा गया है।

प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। खदान संचालकों पर लगाए गए करोड़ों रुपये के जुर्माने के मामले नौ साल तक डबरा एसडीएम कोर्ट में लंबित रहे। इस लंबी अवधि में न तो सुनवाई पूरी की गई और न ही जुर्माने की वसूली सुनिश्चित की गई। कोर्ट की सख्ती के बाद अब शासन ने डबरा एसडीएम का तबादला कर दिया है और नई एसडीएम को रिकॉर्ड के साथ कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।

अवैध परिवहन पर भी कोर्ट की नजर

अदालत ने बिलौआ क्षेत्र में पत्थरों के अवैध परिवहन और ओवरलोडिंग की निगरानी के लिए लगाए गए ई-चेकगेट के फुटेज भी जब्त करने के आदेश दिए हैं। इन फुटेज का संचालन सीधे भोपाल मुख्यालय से होता है। कोर्ट का उद्देश्य यह पता लगाना है कि वास्तविक आंकड़ों में कितनी हेराफेरी की गई है और अवैध परिवहन का दायरा कितना बड़ा है।

हाईकोर्ट के इस कड़े रुख के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है। अब देखना यह होगा कि अगली सुनवाई में सरकार की ओर से क्या जवाब पेश किया जाता है और इन 83 खदानों के भविष्य पर कोर्ट क्या अंतिम निर्णय लेती है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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