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ग्वालियर: 14 साल के बच्चे के सिर और पैर में घुसा त्रिशूल, डॉक्टरों ने 5 घंटे की जटिल सर्जरी कर बचाई जान

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

15 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
ग्वालियर: 14 साल के बच्चे के सिर और पैर में घुसा त्रिशूल, डॉक्टरों ने 5 घंटे की जटिल सर्जरी कर बचाई जान
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ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल (JAH) के डॉक्टरों ने एक बेहद दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण मामले में 14 वर्षीय किशोर की जान बचाकर चिकित्सा जगत में एक मिसाल पेश की है। छतरपुर जिले के धरकुआ निवासी शिवम नामक यह बालक एक भीषण हादसे का शिकार हो गया था, जिसमें लोहे का एक त्रिशूल उसके सिर और पैर के आर-पार हो गया था। पांच घंटे तक चली मैराथन सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने न केवल त्रिशूल को सुरक्षित बाहर निकाला, बल्कि बच्चे की आंखों की रोशनी और मस्तिष्क की कार्यक्षमता को भी पूरी तरह सुरक्षित रखने में सफलता प्राप्त की।

छत से गिरने के दौरान हुआ हादसा

घटना 25 जून की है, जब शिवम अपने घर की छत पर खेल रहा था। इसी दौरान उसका संतुलन बिगड़ा और वह सीधे नीचे स्थित माता की मढ़िया पर जा गिरा। मढ़िया पर लगे त्रिशूल का एक फाल उसकी बाईं आंख के पास से प्रवेश करते हुए खोपड़ी को चीरता हुआ दूसरी तरफ निकल गया। वहीं, त्रिशूल का दूसरा हिस्सा उसके बाएं पैर में बुरी तरह धंस गया। इस भयावह स्थिति में परिजनों ने सूझबूझ दिखाते हुए ग्राइंडर की मदद से त्रिशूल का बाहरी हिस्सा काटा, ताकि बच्चे को अस्पताल ले जाया जा सके।

गंभीर हालत में शिवम को ग्वालियर के जेएएच ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। वहां डॉक्टरों ने पाया कि त्रिशूल का फाल मस्तिष्क के बेहद संवेदनशील हिस्से के पास से गुजरा था। जरा सी भी लापरवाही बच्चे की जान ले सकती थी या उसे जीवनभर के लिए दिव्यांग बना सकती थी।

जटिल सर्जरी और डॉक्टरों की टीम

न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. अविनाश शर्मा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत एक विशेषज्ञ टीम का गठन किया। इस टीम में डॉ. आनंद शर्मा, रेजीडेंट चिकित्सक डॉ. पृथ्वीराज, डॉ. सौम्या प्रधान, सर्जरी विभाग के डॉ. एमएम मुदगल और डॉ. अनिल शर्मा के साथ एनेस्थीसिया की टीम शामिल थी। डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती त्रिशूल को इस तरह बाहर निकालना था कि मस्तिष्क की नसों और आंखों की रोशनी को कोई नुकसान न पहुंचे।

पांच घंटे तक चली इस अत्यंत जटिल सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने बेहद सावधानी बरती। राहत की बात यह रही कि ऑपरेशन के दौरान रक्तस्राव बहुत कम हुआ और बच्चे को अतिरिक्त रक्त चढ़ाने की आवश्यकता भी नहीं पड़ी। सर्जरी सफल रही और त्रिशूल को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया गया।

स्वस्थ होकर घर लौटा शिवम

सर्जरी के बाद शिवम को गहन निगरानी में रखा गया। डॉक्टरों की कड़ी मेहनत और उचित उपचार का परिणाम यह रहा कि बच्चा तेजी से रिकवर हुआ। उसके बोलने, सुनने और देखने की क्षमता पूरी तरह सामान्य बनी रही। अस्पताल में कुछ दिनों तक स्वास्थ्य लाभ लेने के बाद, मंगलवार को उसे पूरी तरह स्वस्थ घोषित कर छुट्टी दे दी गई।

चिकित्सकों का कहना है कि यह मामला मेडिकल साइंस के नजरिए से बेहद चुनौतीपूर्ण था। जिस तरह से त्रिशूल ने मस्तिष्क के संवेदनशील हिस्सों को छुआ था, उसमें मरीज का जीवित बचना और सामान्य होना किसी चमत्कार से कम नहीं है। फिलहाल, शिवम के परिजन उसे सकुशल घर ले जाने पर डॉक्टरों की टीम का आभार व्यक्त कर रहे हैं।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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