गोरखपुर: एमएमएमयूटी दीक्षांत समारोह में राज्यपाल की दो टूक, कहा- कैंपस में नशा बर्दाश्त नहीं
महाकुंभ का आज 24वां दिन है। सुबह 8 बजे तक 37.48 लाख श्रद्धालुओं ने स्नान किया। 13 जनवरी से अब तक 38.66 करोड़ श्रद्धालु स्नान कर चुके हैं।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

एमएमएमयूटी दीक्षांत समारोह में राज्यपाल की सख्त नसीहत
गोरखपुर स्थित मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) के दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों को स्पष्ट संदेश दिया। समारोह में शिरकत करने पहुंचीं राज्यपाल ने कैंपस में व्याप्त अव्यवस्थाओं और नशीले पदार्थों के सेवन पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि छात्र यहां पढ़ने आते हैं, इसलिए उन्हें शराब और सिगरेट जैसी आदतों से दूर रहना चाहिए।
राज्यपाल ने हॉस्टल परिसरों की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि रमन बॉयज हॉस्टल के कचरे में शराब की बोतलें और सिगरेट के पैकेट मिलना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से पूछा कि प्रधानमंत्री के नशा मुक्ति अभियान के बावजूद कैंपस में ऐसी चीजें कैसे पहुंच रही हैं। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि इन गतिविधियों को तुरंत बंद किया जाना चाहिए।
भवन निर्माण और स्वच्छता पर उठाए सवाल
समारोह के दौरान राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे और रखरखाव पर भी असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि 2015 से बन रहा ऑडिटोरियम आज तक पूरा नहीं हो सका है, जो प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। इसके अलावा, उन्होंने कस्तूरबा छात्रावास में लंबे समय से फैली गंदगी और छात्रों के परिजनों के बैठने की उचित व्यवस्था न होने पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने निर्देश दिया कि इन कमियों को दूर करने के लिए एक समिति बनाई जाए, जिसमें छात्रों को भी शामिल किया जाए।
राज्यपाल ने तकनीकी शिक्षा मंत्री की मौजूदगी में विश्वविद्यालय के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और उपयोगिता पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि केवल बजट मिल जाने का मतलब यह नहीं है कि कहीं भी कोई भी भवन बना दिया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में निर्माण कार्यों की योजना बनाते समय उनकी उपयोगिता और आवश्यकता पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
मेधावियों को सम्मान और महिला सशक्तिकरण पर जोर
दीक्षांत समारोह में शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए 20 मेधावी विद्यार्थियों को कुल 46 स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। इस वर्ष कुल 1523 उपाधियां वितरित की गईं, जिनमें 1522 छात्र-छात्राएं और एक मानद डी.एससी. उपाधि शामिल रही। राज्यपाल ने इस बात पर खुशी जताई कि उपाधि प्राप्त करने वालों में 60 प्रतिशत बेटियां शामिल हैं, जो महिला सशक्तिकरण का एक बड़ा उदाहरण है।
अपने संबोधन में राज्यपाल ने युवाओं से चरित्र निर्माण पर ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का असली उद्देश्य डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि समाज और देश की भलाई के लिए कार्य करना है। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि कोई भी काम छोटा नहीं होता और ईमानदारी से किया गया हर कार्य सम्मान के योग्य है।
सामाजिक जिम्मेदारी और भविष्य की राह
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय प्रशासन को जल संरक्षण, सौर ऊर्जा के उपयोग और गोद लिए गए गांवों को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने परिषदीय विद्यालयों के बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि इन बच्चों को सही अवसर मिले तो वे भविष्य के सफल नेतृत्वकर्ता बन सकते हैं।
अंत में, उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने घोषणा की कि परिषदीय विद्यालयों के बच्चों द्वारा सुनाई गई प्रेरक कहानियों को एक पुस्तक का रूप दिया जाएगा, ताकि उन्हें अन्य विद्यालयों में भी वितरित किया जा सके। इस आयोजन के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि शैक्षणिक संस्थानों को केवल पढ़ाई तक सीमित न रहकर सामाजिक सुधार का केंद्र भी बनना चाहिए।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
