डिंडौरी में जमीन हड़पने का अनोखा फर्जीवाड़ा: मृत व्यक्ति के नाम पर दर्ज कराई संपत्ति, जांच के आदेश
Dindori land fraud case: Grandson alleges granduncles betrayal with patwari. जमीन हड़पने का अनोखा मामला सामने आया है। अनोखा इसलिए, क्योंकि जिस शख्स पर आरोप लगा है, उसने दस्तावेजों में अपने पिता का नाम ही बदल दिया।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले की बजाग तहसील से जमीन हड़पने का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक व्यक्ति ने सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर करने के लिए अपने ही पिता का नाम बदल दिया और मृत दादा की संपत्ति को अपने नाम दर्ज करवा लिया। इस मामले ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है और अब प्रशासन ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
मामला सुकुलपुरा निवासी जियालाल वनवासी की जमीन से जुड़ा है, जिनका निधन वर्ष 1996 में हो गया था। जियालाल के पोते शिवराज ने आरोप लगाया है कि उनके दादा के चचेरे भाई गणेश वनवासी ने पटवारी के साथ मिलीभगत कर इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। शिवराज के अनुसार, उनके दादा की मृत्यु के समय वे सभी काफी छोटे थे, जिसके चलते उन्हें अपनी पैतृक संपत्ति की सही जानकारी नहीं थी। इस बीच, गणेश वनवासी ने वर्ष 2022 में ग्राम पंचायत से जियालाल का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया।
दस्तावेजों के अनुसार, गणेश वनवासी ने तहसील कार्यालय में फौती नामांतरण की प्रक्रिया पूरी करवाई। इस दौरान उसने अपने पिता का नाम हरिलाल के स्थान पर जियालाल लिखवा दिया, जिससे वह कानूनी रूप से जियालाल का पुत्र बन गया। इस हेरफेर के जरिए उसने खसरा नंबर 132 की 0.0300 हेक्टेयर जमीन अपने और अपने परिवार के अन्य सदस्यों के नाम दर्ज करवा ली। इस भूखंड की बाजार कीमत करीब 11 लाख रुपये बताई जा रही है।
दस्तावेजों में पकड़ी गई गड़बड़ी
शिवराज वनवासी ने बताया कि जब उन्होंने सरकारी पोर्टल पर अपनी जमीन की स्थिति जांची, तो उन्हें इस धोखाधड़ी का पता चला। उन्होंने आरोप लगाया कि हल्का पटवारी नर्मदा मुराली ने बिना किसी ठोस जांच के फर्जी वंशावली तैयार की और रिपोर्ट तहसील कार्यालय को भेज दी। दस्तावेजों में जो आधार कार्ड इस्तेमाल किया गया, उसमें गणेश के पिता का नाम हरिलाल दर्ज है, जबकि नामांतरण में उसे जियालाल का बेटा दिखाया गया है। यह विरोधाभास ही इस पूरे फर्जीवाड़े का मुख्य सबूत बन गया है।
दूसरी ओर, आरोपी गणेश वनवासी की पत्नी नन्ही बाई का कहना है कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि जियालाल उनके दादा ससुर थे और वे लंबे समय से उसी घर में रह रहे हैं। वहीं, आरोपी पक्ष की मृत्यु 2025 में हो चुकी है, जिसके बाद अब उनकी पत्नी और बच्चे इस संपत्ति पर काबिज हैं।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई
इस मामले में आरोपित पटवारी नर्मदा मुराली ने अपना बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने केवल ग्राम पंचायत से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर ही अपनी रिपोर्ट तैयार की थी। उनके अनुसार, तहसील न्यायालय से फौती नामांतरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही जमीन का नामांतरण हुआ है। उन्होंने किसी भी प्रकार की मिलीभगत से इनकार किया है।
बजाग के एसडीएम अक्षय डिगरसे ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि नामांतरण और फौती नामा में गलत तरीके से नाम जुड़ने की शिकायत प्राप्त हुई है। यदि जांच में यह साबित होता है कि दस्तावेजों में हेरफेर की गई है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, जियालाल के परिवार ने न्याय की गुहार लगाई है और इस फर्जीवाड़े को निरस्त करने की मांग की है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
