दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण पर लगाम: आज से वर्क फ्रॉम होम और पुरानी गाड़ियों पर सख्त पाबंदियां लागू
अब दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड BS-VI से कम मानक वाली गाड़ियां राजधानी में नहीं आ सकेंगी। यह रोक 31 जनवरी 2027 तक रहेगी।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

सर्दियों में प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली-एनसीआर में नई पाबंदियां शुरू
दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में सर्दियों के दौरान बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से 1 नवंबर से कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए गए हैं। प्रशासन ने हवा की गुणवत्ता को सुधारने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिनमें वाहनों की आवाजाही पर रोक और कार्यालयों में काम करने के तरीकों में बदलाव शामिल है। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य सर्दियों के महीनों में जहरीली होती हवा को सुरक्षित स्तर पर बनाए रखना है।
नए नियमों के तहत, दिल्ली के बाहर पंजीकृत BS-VI मानक से कम वाली गाड़ियों के राजधानी में प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। यह प्रतिबंध 31 जनवरी 2027 तक प्रभावी रहेगा। इसके अलावा, सरकारी और निजी कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर भी निर्देश जारी किए गए हैं, जिसके अनुसार 50 प्रतिशत कर्मचारियों को घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) करने की सलाह दी गई है। सार्वजनिक पार्किंग स्थलों पर भी शुल्क दोगुना कर दिया गया है ताकि निजी वाहनों के उपयोग को कम किया जा सके।
विंटर पॉल्यूशन एक्शन प्लान और GRAP की भूमिका
दिल्ली सरकार द्वारा जुलाई 2026 में स्वीकृत 'विंटर पॉल्यूशन एक्शन प्लान' के तहत यह व्यवस्था की गई है कि हर साल 1 नवंबर से 28 फरवरी तक प्रदूषण विरोधी उपाय स्वतः लागू हो जाएंगे। पहले प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत पाबंदियां लगाई जाती थीं, लेकिन अब नए नियमों के अनुसार, प्रदूषण के स्तर का इंतजार किए बिना ही पूर्व निर्धारित तारीखों पर प्रतिबंध प्रभावी हो जाते हैं।
GRAP प्रणाली, जिसे जनवरी 2017 में लागू किया गया था, वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के आधार पर चार चरणों में प्रतिबंधों को वर्गीकृत करती है। इसका मुख्य उद्देश्य हवा की गुणवत्ता खराब होने पर तत्काल प्रभाव से नियंत्रण के उपाय करना है। हालांकि, इस वर्ष सरकार ने पहले से ही सख्त रुख अपनाते हुए विंटर प्लान को समयबद्ध तरीके से लागू करने का निर्णय लिया है।
पिछले वर्षों की तुलना में हवा की स्थिति में सुधार
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस साल दिल्ली की हवा में पिछले आठ वर्षों की तुलना में सुधार देखा गया है। अक्टूबर 2026 में औसत AQI 166 दर्ज किया गया, जो 2018 के बाद से इस महीने का सबसे निचला और बेहतर स्तर है। मंत्रालय के अनुसार, जनवरी से अक्टूबर 2026 के बीच दिल्ली में 220 दिन ऐसे रहे जब हवा की गुणवत्ता संतोषजनक श्रेणी में थी, जो पिछले वर्षों की तुलना में अधिक है।
इसके विपरीत, खराब से गंभीर श्रेणी वाले दिनों की संख्या में भी कमी आई है। इस साल जनवरी से अक्टूबर के बीच 84 दिन ऐसे रहे जब AQI 200 से ऊपर था, जबकि पिछले साल यह संख्या 104 थी। यह आंकड़े बताते हैं कि प्रदूषण नियंत्रण के उपायों का असर जमीनी स्तर पर दिखाई दे रहा है, हालांकि सर्दियों के आने के साथ ही चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
आगे की राह और चुनौतियां
आने वाले महीनों में मौसम में बदलाव के साथ प्रदूषण का स्तर बढ़ने की आशंका बनी रहती है। प्रशासन का पूरा ध्यान अब इन प्रतिबंधों के कड़ाई से पालन पर है। दिल्ली-एनसीआर के सीमाओं पर पुलिस बल तैनात किए गए हैं ताकि बाहर से आने वाले वाहनों की जांच की जा सके और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जा सके। आने वाले समय में हवा की गुणवत्ता के आधार पर इन प्रतिबंधों की समीक्षा भी की जा सकती है।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!