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बागपत: सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी करने वाले 13 ईंट भट्टों पर प्रशासन का चला डंडा

बागपत जनपद में पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। अवैध रूप से संचालित हो रहे 13 ईंट भट्टों का संचालन बंद करा दिया गया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

8 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें
बागपत: सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी करने वाले 13 ईंट भट्टों पर प्रशासन का चला डंडा
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उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में पर्यावरण संरक्षण को लेकर जिला प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। जिले में नियमों को ताक पर रखकर संचालित किए जा रहे 13 ईंट भट्टों को प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से बंद करवा दिया है। यह कदम सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और पर्यावरण मंत्रालय के कड़े नियमों के अनुपालन के तहत उठाया गया है।

नियमों के उल्लंघन पर हुई कार्रवाई

जिलाधिकारी अस्मिता लाल के नेतृत्व में चलाए गए इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य एनसीआर क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाना है। सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पर्यावरण सुरक्षा के मद्देनजर ईंट भट्टों के संचालन के लिए सख्त मानक तय किए हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की हालिया जांच रिपोर्ट में जिले के 16 ईंट भट्टों को पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन करते हुए पाया गया था, जिसके बाद प्रशासन ने यह सख्त रुख अपनाया है।

प्रशासनिक जांच में पाया गया कि ये भट्टे बिना उचित अनुमति और पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी करते हुए चलाए जा रहे थे। इन भट्टों के विरुद्ध वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम के तहत कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। दोषी पाए गए संचालकों पर भारी जुर्माना लगाने की तैयारी है, जो 10 हजार रुपये से लेकर 15 लाख रुपये तक हो सकता है।

प्रदूषण के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि जिले में पर्यावरण प्रदूषण फैलाने वाले किसी भी स्रोत को बख्शा नहीं जाएगा। समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि केवल ईंट भट्टे ही नहीं, बल्कि अस्पताल, औद्योगिक इकाइयां और अन्य प्रदूषण फैलाने वाले कारकों की भी नियमित निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण के मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

प्रशासन ने संबंधित विभागों को संयुक्त टीम बनाकर नियमित निरीक्षण करने का आदेश दिया है। इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिले की हवा की गुणवत्ता में सुधार हो और एनसीआर के मानकों का पूरी तरह से पालन हो सके। अवैध रूप से संचालित अन्य भट्टों की पहचान के लिए भी सर्वे का काम जारी है।

हरियाली बढ़ाने पर भी जोर

प्रदूषण पर नियंत्रण के साथ-साथ प्रशासन ने वृक्षारोपण को भी प्राथमिकता दी है। 'वृक्षारोपण महाअभियान-2026' के तहत जिले के सभी ईंट भट्टा संचालकों से अपील की गई है कि वे अपने परिसर में कम से कम 100 पौधे लगाएं। इस पहल का उद्देश्य औद्योगिक क्षेत्रों में हरित आवरण को बढ़ाना है ताकि पर्यावरण का संतुलन बना रहे।

प्रशासन की इस कार्रवाई से जिले के अन्य भट्टा संचालकों में हड़कंप मच गया है। जो भट्टे अभी तक मानकों का पालन नहीं कर रहे थे, उन्हें अब तत्काल प्रभाव से अपने संचालन में सुधार करने या कानूनी कार्रवाई का सामना करने की चेतावनी दी गई है। आने वाले दिनों में प्रशासन की यह सख्ती जारी रहने की संभावना है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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