उज्जैन: सिंहस्थ 2028 की राह में बाधा बनी शाही मस्जिद पर कोर्ट का बड़ा फैसला, याचिकाएं खारिज
सिंहस्थ महापर्व 2028 को लेकर उज्जैन में सड़कों के चौड़ीकरण का काम तेजी से चल रहा है। इस बीच, गोपाल मंदिर मार्ग के चौड़ीकरण के रास्ते में आ रही करीब 100 साल पुरानी शाही मस्जिद को हटाने के खिलाफ दायर दोनों याचिकाओं को इंदौर हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

सड़क चौड़ीकरण का रास्ता हुआ साफ
उज्जैन में आगामी सिंहस्थ महापर्व 2028 की तैयारियों के बीच गोपाल मंदिर मार्ग के चौड़ीकरण को लेकर चल रहा कानूनी विवाद अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने इस मार्ग पर स्थित करीब 100 साल पुरानी शाही मस्जिद को हटाने के खिलाफ दायर की गई दोनों याचिकाओं को खारिज कर दिया है। जस्टिस संदीप एन. भट्ट की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद यह आदेश दिया, जिससे नगर निगम के लिए सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई शुरू करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
न्यायालय के इस फैसले के बाद अब प्रशासन की ओर से आगे की कार्रवाई की उम्मीद बढ़ गई है। हालांकि, कोर्ट के विस्तृत और औपचारिक आदेश की प्रतीक्षा की जा रही है। यह मामला लंबे समय से चर्चा में था क्योंकि मस्जिद प्रबंधन इसे ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का स्थल बताकर हटाने का विरोध कर रहा था।
याचिकाकर्ताओं की दलीलें और कानूनी लड़ाई
मस्जिद प्रबंधन की ओर से दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई थीं। पहली याचिका शाही मस्जिद वक्फ पंचायत मोचियान के प्रतिनिधियों द्वारा और दूसरी याचिका वक्फ पंच मोचियान के अध्यक्ष की ओर से लगाई गई थी। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि यह मस्जिद 100 साल से अधिक पुरानी है और इसके ऐतिहासिक साक्ष्य मौजूद हैं। उन्होंने 17 मार्च 1925 के सिंधिया राजघराने के समय के दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा था कि उस समय भी मस्जिद के हिस्से को यथावत रखने का निर्देश दिया गया था।
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता सैय्यद अशहर अली वारसी ने स्पष्ट किया है कि विस्तृत आदेश मिलने के बाद वे कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श करेंगे। उन्होंने संकेत दिया है कि इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय की डबल बेंच या सर्वोच्च न्यायालय में अपील की जा सकती है। फिलहाल, मस्जिद पक्ष अपनी अगली कानूनी रणनीति तैयार करने में जुटा है।
सिंहस्थ 2028 और विकास की प्राथमिकताएं
प्रशासन का तर्क है कि सिंहस्थ 2028 के दौरान उज्जैन में लाखों श्रद्धालुओं का आगमन होगा, जिसके मद्देनजर शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना अनिवार्य है। गोपाल मंदिर मार्ग शहर के सबसे व्यस्त और संकरे रास्तों में से एक है। यातायात के दबाव को कम करने और भीड़ प्रबंधन को सुचारू बनाने के लिए इस सड़क का चौड़ीकरण अत्यंत आवश्यक माना जा रहा है। नगर निगम का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई मास्टर प्लान के तहत और निर्धारित नियमों का पालन करते हुए की जा रही है।
नगर निगम ने पहले ही मस्जिद प्रबंधन को नोटिस जारी कर दिया था, जिसके बाद से ही स्थानीय स्तर पर विरोध के स्वर उठ रहे थे। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य सिंहस्थ से पहले शहर की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब सबकी नजरें नगर निगम की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। हालांकि, कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि मस्जिद प्रबंधन ऊपरी अदालत में अपील करता है, तो मामले में और देरी हो सकती है। फिलहाल, प्रशासन की ओर से विस्तृत आदेश का अध्ययन किया जा रहा है, जिसके बाद ही मस्जिद को विस्थापित करने या हटाने की प्रक्रिया पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
उज्जैन के विकास और धार्मिक आयोजन की तैयारियों के बीच यह मामला एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। प्रशासन और स्थानीय समुदाय के बीच संतुलन बनाए रखना अब सबसे बड़ी चुनौती है, ताकि सिंहस्थ की तैयारियों में कोई बाधा न आए और कानून व्यवस्था भी बनी रहे।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!