सोनीपत: बिजली निजीकरण के खिलाफ सड़कों पर उतरे कर्मचारी, 11 अगस्त से तीन दिवसीय हड़ताल का ऐलान
Haryana electricity workers protest against privatization in Sonipat, announce three-day statewide strike. हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले बुधवार को सोनीपत में बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं ने निजीकरण की नीतियों के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। शहर के अलग-अलग स्थानों से पैदल मार्च निकालते हुए कर्मचारी मिनी सचिवालय पहुंचे, जहां सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की गई।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

निजीकरण नीतियों के विरोध में सोनीपत में प्रदर्शन
हरियाणा के सोनीपत में बिजली विभाग के कर्मचारियों और अभियंताओं ने निजीकरण की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में बुधवार को शहर के विभिन्न हिस्सों से एक विशाल पैदल मार्च निकाला गया। प्रदर्शनकारी कर्मचारी नारेबाजी करते हुए मिनी सचिवालय पहुंचे, जहां उन्होंने सरकार की नीतियों के प्रति अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन के जरिए सरकार को आगामी 11, 12 और 13 अगस्त को तीन दिवसीय राज्यव्यापी हड़ताल का औपचारिक नोटिस दिया गया है। कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सरकार ने समय रहते सकारात्मक रुख नहीं अपनाया, तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।
एग्री डिस्कॉम और स्मार्ट मीटर का कड़ा विरोध
संयुक्त संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि बिजली निगमों के पुनर्गठन के समय जो सुधार और लाभ के दावे किए गए थे, वे पूरी तरह विफल रहे हैं। स्थिति में सुधार होने के बजाय विभागीय घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है। कर्मचारियों ने हरियाणा एग्री डिस्कॉम बनाने की प्रस्तावित योजना, गुरुग्राम और नूंह में निजी बिजली वितरण लाइसेंस देने की प्रक्रिया और स्मार्ट मीटर लगाने के काम को तुरंत रोकने की मांग की है।
संगठन का तर्क है कि कृषि फीडरों की व्यवस्था पहले से ही सुचारू है, इसलिए नई कंपनी बनाने की कोई आवश्यकता नहीं है। कर्मचारियों का कहना है कि निजीकरण से न केवल विभाग की कार्यक्षमता प्रभावित होगी, बल्कि उपभोक्ताओं पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
पुरानी पेंशन और नियमितीकरण समेत कई मांगें
हड़ताल की घोषणा के साथ ही कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों की सूची भी जारी की है। इसमें पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करना, डीसी रेट और एचकेआरएन के तहत कार्यरत कर्मचारियों को नियमित करना, समान कार्य के लिए समान वेतन और विभाग में नई भर्तियां करना प्रमुख हैं। इसके अलावा, कर्मचारियों ने ऑनलाइन ट्रांसफर नीति को वापस लेने, जोखिम भत्ता बढ़ाने और अभियंताओं के लिए समयबद्ध प्रमोशन की मांग की है।
ज्ञापन में महिला कर्मचारियों के लिए क्रेच सुविधा, सेवानिवृत्त कर्मचारियों को मुफ्त बिजली यूनिट और लंबित वेतन विसंगतियों को दूर करने जैसे मुद्दे भी शामिल किए गए हैं। संघर्ष मोर्चा का कहना है कि ये मांगें केवल कर्मचारियों के हित के लिए नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली सेवा सुनिश्चित करने के लिए भी आवश्यक हैं।
सरकार को दी अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि एग्री डिस्कॉम गठन की अधिसूचना जारी की जाती है, तो वर्तमान में घोषित तीन दिवसीय हड़ताल को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल दिया जाएगा। कर्मचारियों ने कहा कि लंबे समय से बातचीत और ज्ञापनों के बावजूद सरकार ने उनकी समस्याओं के प्रति उदासीनता दिखाई है।
अंत में, कर्मचारियों ने सरकार से निजीकरण की नीतियों पर पुनर्विचार करने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो प्रदेशभर में होने वाले व्यापक आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
