सोनीपत: एनीमिया मुक्त भारत अभियान में बड़ी उपलब्धि, 66 हजार से अधिक लोगों की हुई जांच
सोनीपत में एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के तहत जिला समन्वय एवं समन्वयन समिति की त्रैमासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। उन्होंने बताया कि एक माह तक चले विशेष अभियान के दौरान जिले में छह लक्षित लाभार्थी वर्गों के 66,347 लोगों की हीमोग्लिबिन जांच (स्क्रीनिंग) की गई।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

एनीमिया मुक्त भारत अभियान में सोनीपत का शानदार प्रदर्शन
सोनीपत जिले ने 'एनीमिया मुक्त भारत' कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य सेवाओं में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। हाल ही में जिला सचिवालय में आयोजित त्रैमासिक समीक्षा बैठक में जिले के स्वास्थ्य आंकड़ों की विस्तृत रिपोर्ट पेश की गई। इस दौरान सामने आया कि एक महीने तक चले विशेष अभियान के अंतर्गत जिले में 66,347 लोगों की हीमोग्लोबिन जांच की गई है। इस उल्लेखनीय प्रदर्शन के चलते सोनीपत ने पूरे हरियाणा राज्य में दूसरा स्थान प्राप्त किया है।
बैठक की अध्यक्षता सिटी मजिस्ट्रेट ने की, जिसमें सिविल सर्जन डॉ. अनुराधा जैन और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, स्क्रीनिंग के अलावा 2,514 एनीमिक लाभार्थियों का सफलतापूर्वक फॉलो-अप भी किया गया है, जो इस अभियान की सफलता को दर्शाता है।
बेहतर प्रदर्शन करने वाले केंद्रों की सराहना
समीक्षा बैठक के दौरान आरबीएसके टीम, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) बड़खालसा और सीएचसी जुआं के कार्यों की विशेष सराहना की गई। इन केंद्रों ने स्क्रीनिंग और डेटा रिपोर्टिंग में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। अधिकारियों ने इन टीमों के प्रयासों को जिले की सफलता का मुख्य आधार बताया।
दूसरी ओर, जिन केंद्रों की प्रगति धीमी रही, उन्हें सुधार के निर्देश दिए गए हैं। विशेष रूप से सीएचसी खरखौदा और सीएचसी हलालपुर को अपनी स्क्रीनिंग गतिविधियों में तेजी लाने के लिए कहा गया है। इन केंद्रों को निर्देश दिए गए हैं कि वे माइक्रो प्लान तैयार करें ताकि निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा किया जा सके।
अभियान को जन-आंदोलन बनाने पर जोर
सिटी मजिस्ट्रेट ने अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने शिक्षा, महिला एवं बाल विकास और स्वास्थ्य विभाग को मिलकर काम करने का निर्देश दिया ताकि आयरन-फोलिक एसिड की उपलब्धता और जन-जागरूकता कार्यक्रमों को हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचाया जा सके।
सिविल सर्जन डॉ. अनुराधा जैन ने कहा कि एनीमिया की दर को कम करने के लिए नियमित जांच और समय पर उपचार अनिवार्य है। उन्होंने सभी विभागों से आह्वान किया कि वे इस अभियान को केवल एक सरकारी कार्यक्रम न मानकर इसे एक जन-आंदोलन का रूप दें, ताकि जिले के हर नागरिक को स्वास्थ्य सुरक्षा मिल सके।
भविष्य की रणनीति और सामूहिक संकल्प
बैठक के अंत में सभी संबंधित विभागों ने भविष्य में एनीमिया मुक्त भारत अभियान को और अधिक गति देने का संकल्प लिया। स्वास्थ्य विभाग ने छह लक्षित श्रेणियों का विश्लेषण करते हुए उन क्षेत्रों की पहचान की है जहां भविष्य में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। यह रणनीति जिले में एनीमिया की व्यापकता को जड़ से खत्म करने में सहायक सिद्ध होगी।
इस समीक्षा बैठक में शिक्षा विभाग, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी, सीडीपीओ और अन्य वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों ने भाग लिया। सभी अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में स्क्रीनिंग और उपचार की प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी बनाने का आश्वासन दिया है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
