सिंगरौली: सरकारी अस्पताल के वार्ड में सर्पदंश पीड़िता पर झाड़फूंक, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
Deosar hospital witchcraft video surfaces causing controversy. सिंगरौली जिले के देवसर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सर्पदंश पीड़िता के इलाज के दौरान कथित झाड़फूंक का वीडियो सामने आया है। सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद सरकारी अस्पताल में अंधविश्वास और व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जिले के देवसर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सर्पदंश से पीड़ित एक किशोरी के इलाज के दौरान अस्पताल के वार्ड के भीतर कथित तौर पर झाड़फूंक किए जाने का वीडियो वायरल हो गया है। इस घटना ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली और अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वार्ड के भीतर तंत्र-मंत्र का खेल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, हर्राबीर्ती गांव की रहने वाली 16 वर्षीय कौशल्या यादव को शुक्रवार दोपहर एक सांप ने काट लिया था। परिजन उसे गंभीर अवस्था में देवसर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने तत्काल उपचार शुरू किया। इसी बीच, अस्पताल के वार्ड के अंदर ही कुछ लोगों द्वारा पीड़िता पर झाड़फूंक करने का वीडियो सामने आया। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर इस तरह की अंधविश्वास से जुड़ी गतिविधियों ने वहां मौजूद लोगों को भी स्तब्ध कर दिया।
इसी अस्पताल में जियावन बहेरा निवासी 17 वर्षीय मोहम्मद इमरान को भी सर्पदंश के बाद भर्ती कराया गया था। फिलहाल, दोनों मरीजों की स्थिति स्थिर बताई जा रही है और चिकित्सकों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है। हालांकि, अस्पताल के वार्ड में झाड़फूंक का वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का बाजार गर्म है।
अधिकारियों का अजीब तर्क
इस पूरे मामले पर जब बीएमओ (ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर) से प्रतिक्रिया ली गई, तो उनका जवाब चौंकाने वाला था। बीएमओ ने कहा कि ग्रामीणों को बार-बार समझाने के बावजूद वे झाड़फूंक करने वालों को अस्पताल के भीतर ले आते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि मरीज के लिए 'दवा और दुआ' दोनों ही जरूरी हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि पीड़िता कौशल्या को समय रहते एंटी-स्नेक वेनम का इंजेक्शन दिया गया था, जिससे अब वह खतरे से बाहर है।
चिकित्सकीय दृष्टिकोण से सर्पदंश का उपचार केवल एंटी-स्नेक वेनम के माध्यम से ही संभव है। ऐसे में अस्पताल परिसर में झाड़फूंक को बढ़ावा मिलना या उसे नजरअंदाज करना स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को दर्शाता है। यह घटना दर्शाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी अंधविश्वास की जड़ें कितनी गहरी हैं।
प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे सवाल
अस्पताल के वार्ड में इस तरह की गतिविधियों के होने से यह स्पष्ट होता है कि वहां सुरक्षा और निगरानी का अभाव है। मरीज के परिजनों द्वारा अस्पताल के भीतर तंत्र-मंत्र करना न केवल चिकित्सा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि अन्य मरीजों के लिए भी असुविधा का कारण बनता है। अब स्थानीय लोग और जागरूक नागरिक इस मामले में स्वास्थ्य विभाग से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस घटना की जांच या किसी प्रकार के अनुशासनात्मक निर्देश जारी किए जाने की कोई आधिकारिक सूचना नहीं है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाता है या नहीं।
अंधविश्वास के कारण अक्सर सर्पदंश के मामलों में देरी होती है, जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाती है। ऐसे में स्वास्थ्य केंद्रों का यह कर्तव्य है कि वे मरीजों और उनके परिजनों को वैज्ञानिक उपचार के प्रति जागरूक करें और अस्पताल परिसर में किसी भी प्रकार की अवैज्ञानिक गतिविधियों को पूरी तरह प्रतिबंधित करें।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
