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रेवाड़ी: बेसहारा पशुओं के आतंक के बीच पशुपालकों की दबंगई, प्रशासन की चेतावनी बेअसर

रेवाड़ी में 5 दिन में दो लोगों की मौत और प्रशासन की चेतावनी के बाद भी पशु पालक बेखौफ है। सरेआम दादागिरी दिखाकर ठेकेदार के कर्मचारियों के सामने से गाड़ी से पशुओं को मुक्त करवाकर अपने साथ ले जाते है।

मोहम्मद नवेद

मोहम्मद नवेद

एडिटर

21 अगस्त 20262 मिनट पढ़ें
रेवाड़ी: बेसहारा पशुओं के आतंक के बीच पशुपालकों की दबंगई, प्रशासन की चेतावनी बेअसर
मूल स्रोत

प्रशासनिक कार्रवाई के बावजूद पशुपालकों का खुला विरोध

हरियाणा के रेवाड़ी में बेसहारा पशुओं की समस्या विकराल रूप ले चुकी है। नगर परिषद द्वारा पशुओं को पकड़ने के लिए चलाए जा रहे अभियान के बावजूद, कुछ पशुपालकों की दबंगई थमने का नाम नहीं ले रही है। स्थिति यह है कि प्रशासन की सख्त चेतावनी और दो लोगों की मौत के बाद भी पशुपालक सरेआम नगर परिषद के कर्मचारियों को धमकाकर पकड़े गए पशुओं को वैन से छुड़ाकर ले जा रहे हैं।

नगर परिषद के ठेकेदार के कर्मचारियों ने हाल ही में फेज-2 क्षेत्र में अभियान शुरू किया था। इस दौरान कई बार ऐसी घटनाएं सामने आई हैं जहां पशुपालकों ने कर्मचारियों को घेर लिया और वैन का दरवाजा खोलकर पशुओं को मुक्त करा लिया। इन घटनाओं में महिलाओं की भागीदारी भी देखी गई है, जिससे कर्मचारियों में भय और असुरक्षा का माहौल है।

पांच दिन में दो मौतों से शहर में आक्रोश

शहर में पिछले पांच दिनों के भीतर बेसहारा पशुओं के हमले में दो लोगों की जान जा चुकी है। पहली घटना 5 अगस्त को हुई, जब सेक्टर-4 निवासी कैप्टन जगराम यादव सब्जी लेकर घर लौट रहे थे। इस दौरान गाय और सांड के हमले से वे स्कूटी समेत गिर गए और उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। इसके बाद 11 अगस्त को माता चौक के पास प्रताप सिंह यादव पर गायों के झुंड ने हमला कर दिया, जिससे उनकी भी जान चली गई।

इन घटनाओं के बाद स्थानीय निवासियों और जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश है। प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं। हालांकि, पुलिस ने 17 अगस्त को तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था, लेकिन चार दिन बीत जाने के बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी न होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।

प्रशासन की चेतावनी और भविष्य की चुनौतियां

दो मौतों के बाद जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी थी कि पशुओं को सड़कों पर छोड़ने वाले पशुपालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। डीसी अभिषेक मीणा ने भी स्पष्ट किया था कि नोटिस के बाद भी पशु छोड़ने वालों पर केस दर्ज होगा। नगर परिषद के अधिकारियों ने भी इस मामले में संज्ञान लेने की बात कही है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अभी भी नियंत्रण से बाहर है।

नगर परिषद के ईओ अरुण नांदल ने कहा कि कर्मचारियों से पशु छुड़ाना कानूनन गलत है और इस मामले की जांच सीएसआई द्वारा की जा रही है। शहर के विभिन्न हिस्सों जैसे मिनी बाइपास और धक्का बस्ती के पास बेसहारा गोवंश का जमावड़ा आम बात हो गई है, जो राहगीरों के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है।

अब देखना यह है कि प्रशासन इन दबंग पशुपालकों पर कब तक ठोस कार्रवाई करता है और शहरवासियों को बेसहारा पशुओं के आतंक से कब तक राहत मिल पाती है। फिलहाल, कर्मचारियों के डर और पशुपालकों की मनमानी के बीच यह अभियान एक बड़ी चुनौती बन गया है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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