राजस्थान: केंद्रीय मंत्रियों और विधायकों पर लटके हैं आपराधिक मामले, अदालतों में सालों से चल रही सुनवाई
High Court reveals pending criminal cases against Union Ministers and former MLAs in India. हाईकोर्ट की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि केंद्रीय मंत्री और 13 पूर्व विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं। 5 मंत्रियों और 13 विधायकों के खिलाफ सालों से आपराधिक मामले पैंडिंग चल रहे हैं।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

राजस्थान में जनप्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों का निपटारा एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। हाल ही में सामने आई हाईकोर्ट की स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के कई वर्तमान केंद्रीय मंत्रियों, राज्य सरकार के मंत्रियों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले वर्षों से अदालतों में लंबित हैं। इन मामलों में भ्रष्टाचार के आरोपों से लेकर दंगे और अन्य गंभीर धाराएं शामिल हैं, जिनकी सुनवाई अलग-अलग जिला अदालतों में चल रही है।
हाईकोर्ट की निगरानी में चल रही सुनवाई
राजस्थान हाईकोर्ट मौजूदा और पूर्व सांसदों व विधायकों के खिलाफ लंबित मुकदमों की गंभीरता से मॉनिटरिंग कर रहा है। 30 जून तक की स्थिति के अनुसार, केवल वर्तमान और पूर्व विधायकों के खिलाफ ही 41 आपराधिक मामले विचाराधीन हैं। हाईकोर्ट ने निचली अदालतों को इन मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के निर्देश दिए हैं, ताकि न्याय प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।
अदालती कार्यवाही में देरी के पीछे कई कारण सामने आए हैं। कहीं गवाहों के समय पर पेश न होने से सुनवाई रुकी हुई है, तो कहीं हाईकोर्ट से मिले स्थगन आदेश (स्टे) के कारण मामले आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। कुछ मामलों में अभी भी बहस का दौर जारी है, जबकि कई अन्य में आरोपियों की उपस्थिति सुनिश्चित न होने के कारण प्रक्रिया धीमी है।
मंत्रियों और प्रमुख नेताओं पर लंबित मामले
रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का मामला जोधपुर की अदालत में 2023 से लंबित है। वहीं, कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के खिलाफ थानागाजी और रेलवे कोर्ट में मामले चल रहे हैं। गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम का मामला 2012 से जयपुर की अदालत में लंबित है, जो सीबीआई द्वारा दर्ज किया गया था। इसके अलावा यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा, जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी और ऊर्जा राज्य मंत्री हीरालाल नागर के खिलाफ भी विभिन्न अदालतों में केस चल रहे हैं।
विधायकों की बात करें तो सत्ताधारी दल और विपक्ष दोनों के ही कई नेता इन कानूनी उलझनों में फंसे हैं। बीजेपी विधायक कालीचरण सराफ, जितेंद्र गोठवाल, जयदीप बिहाणी और गोपाल शर्मा जैसे नेताओं के खिलाफ भी मामले लंबित हैं। वहीं, कांग्रेस के शांति धारीवाल, अशोक चांदना, ललित यादव और रामनिवास गावड़िया जैसे विधायकों के खिलाफ भी अलग-अलग अदालतों में सुनवाई जारी है।
किन जिलों में सबसे अधिक मामले?
आंकड़ों के अनुसार, जयपुर की अदालतों में नेताओं के खिलाफ सबसे अधिक 11 मामले लंबित हैं। इसके बाद बांसवाड़ा में 8, जबकि कोटा, जोधपुर और श्रीगंगानगर में 4-4 मामले विचाराधीन हैं। दौसा में 2 मामले पेंडिंग हैं। इसके अलावा अलवर, डूंगरपुर, जैसलमेर, करौली, कोटपूतली-बहरोड़, मेड़ता, सलूंबर, सीकर, टोंक और उदयपुर में एक-एक मामला लंबित है।
दूसरी ओर, राज्य के 10 जिलों में स्थिति अलग है। अजमेर, बाड़मेर, भीलवाड़ा, बीकानेर, चूरू, धौलपुर, हनुमानगढ़, पाली, प्रतापगढ़ और राजसमंद की अदालतों में वर्तमान या पूर्व विधायकों के खिलाफ कोई भी आपराधिक मामला लंबित नहीं है।
न्यायिक प्रक्रिया और भविष्य की राह
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों में देरी से जनता के बीच गलत संदेश जाता है। हाईकोर्ट की निरंतर मॉनिटरिंग का उद्देश्य यही है कि इन मामलों को जल्द से जल्द तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाए। हालांकि, गवाहों की अनुपस्थिति और कानूनी दांव-पेच के कारण कई मामले सालों से खिंच रहे हैं।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालतों द्वारा जारी निर्देशों के बाद इन मामलों की गति में कितना सुधार आता है। हाईकोर्ट की रिपोर्ट ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि कानून की प्रक्रिया सभी के लिए समान है और इन लंबित मामलों का निपटारा ही न्यायपालिका की प्राथमिकता है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
