पानीपत हत्याकांड: पति की हत्या कर खुद बनी थी फरियादी, पत्नी समेत 4 को उम्रकैद
Panipat husband murder case wife convicted life imprisonment crime news updates. पानीपत की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ASJ) सुंदीप सिंह की अदालत ने साढ़े चार साल पुराने एक बेहद सनसनीखेज हत्या के मामले में फैसला सुनाया है। न्यायालय ने पति की बेरहमी से हत्या की साजिश रचने वाली पत्नी सोनू समेत 4 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

साढ़े चार साल पुराने मामले में अदालत का बड़ा फैसला
हरियाणा के पानीपत में एक बेहद चौंकाने वाले हत्याकांड का पटाक्षेप हुआ है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुंदीप सिंह की अदालत ने साढ़े चार साल पुराने एक मामले में अपना फैसला सुनाते हुए चार दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले की सबसे हैरान करने वाली कड़ी यह है कि मृतक की पत्नी ने ही अपने पति की हत्या की साजिश रची थी और बाद में खुद पुलिस के पास जाकर झूठी शिकायत दर्ज कराई थी।
अदालत ने जिन चार लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है, उनमें मृतक अशोक की पत्नी सोनू भी शामिल है। इसके अलावा अजीत, दीपक उर्फ दीपू और सोमबीर को भी हत्या का दोषी पाया गया है। वहीं, मामले में आरोपी बनाई गई एक अन्य महिला ऊषा को अदालत ने साक्ष्यों के अभाव और संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है।
फिल्मी अंदाज में रची गई थी साजिश
घटनाक्रम के अनुसार, 16 जनवरी 2022 को पुराना औद्योगिक क्षेत्र थाने में मामला दर्ज किया गया था। मृतक की पत्नी सोनू ने पुलिस को बताया था कि 19 दिसंबर 2021 को दीपक नाम का एक व्यक्ति उसके पति को घर से ले गया था। इसके बाद 13 जनवरी 2022 को दीपक ने घर आकर उसे धमकाया और दावा किया कि उसने अशोक की हत्या कर दी है। सोनू ने पुलिस को यह भी बताया था कि आरोपी ने उसे मोबाइल पर हत्या का वीडियो भी दिखाया था और शव को नहर में फेंकने की बात कही थी।
पुलिस ने जब इस मामले की गहनता से जांच शुरू की, तो परतें खुलती चली गईं। जांच में सामने आया कि शिकायतकर्ता सोनू ही इस पूरे हत्याकांड की मास्टरमाइंड थी। उसने अपने प्रेम संबंधों और पुरानी रंजिश के चलते अपने साथियों के साथ मिलकर पति को रास्ते से हटाने का षड्यंत्र रचा था।
बेल्ट से पीटकर उतारा मौत के घाट
जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने अशोक को बेरहमी से बेल्ट से पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया था। हत्या के बाद साक्ष्यों को मिटाने के उद्देश्य से शव को नहर में फेंक दिया गया था। पुलिस ने मामले की तफ्तीश के दौरान वारदात में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन और मोटरसाइकिल बरामद की थी, जिसे अदालत में पुख्ता वैज्ञानिक और डिजिटल साक्ष्य के रूप में पेश किया गया।
तत्कालीन उप-निरीक्षक रामकुमार और उनकी टीम द्वारा की गई इस जांच ने न केवल एक निर्दोष की हत्या का खुलासा किया, बल्कि एक पत्नी द्वारा रची गई उस साजिश को भी बेनकाब कर दिया, जिसे उसने पुलिस को गुमराह करने के लिए बुना था। अदालत ने तमाम गवाहों और सबूतों के आधार पर सभी चार दोषियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।
न्याय की जीत
इस मामले ने स्थानीय स्तर पर काफी सुर्खियां बटोरी थीं, क्योंकि एक पत्नी का अपने ही पति की हत्या में शामिल होना और फिर खुद ही पुलिस को गुमराह करना समाज के लिए एक बड़ा सबक है। अदालत के इस फैसले से मृतक के परिजनों को न्याय मिलने की उम्मीद पूरी हुई है। कानून ने स्पष्ट कर दिया है कि अपराध चाहे कितनी भी चतुराई से क्यों न किया जाए, पुलिस की वैज्ञानिक जांच और न्यायिक प्रक्रिया से अपराधी बच नहीं सकते।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
