रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर कचरा प्रबंधन में लापरवाही पर एनजीटी सख्त, रेलवे को दिए सुधार के निर्देश
Bhopal RKMP Railway Station waste management negligence NGT order. एनजीटी ने स्टेशन पर ठोस कचरा प्रबंधन में लापरवाही पर सख्त निर्देश दिए हैं। प्रकरण की सुनवाई न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह, न्यायिक सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी ने की।

मुश्ताक अहमद खान
Editor in chief

रानी कमलापति स्टेशन पर कचरा प्रबंधन की बदहाल स्थिति
भोपाल के रानी कमलापति (RKMP) रेलवे स्टेशन पर ठोस कचरा प्रबंधन को लेकर गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए रेलवे प्रशासन को फटकार लगाई है। स्टेशन परिसर में कचरे के अनुचित प्रबंधन और स्वच्छता मानकों की अनदेखी को लेकर ट्रिब्यूनल ने स्वतः संज्ञान लिया था, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई है।
इस मामले की सुनवाई एनजीटी के न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह और न्यायिक सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने एक संयुक्त जांच समिति द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट का बारीकी से अवलोकन किया। इस रिपोर्ट में स्टेशन परिसर के भीतर कचरा प्रबंधन की व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण खामियां उजागर की गई थीं।
जांच समिति की रिपोर्ट में सामने आई खामियां
संयुक्त जांच समिति ने अपने निरीक्षण के दौरान पाया कि रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के कई हिस्सों में ठोस कचरे का ढेर लगा हुआ है। इसके अलावा, पटरियों के किनारे भी कचरा बिखरा हुआ पाया गया, जो न केवल स्वच्छता के मानकों का उल्लंघन है, बल्कि यात्रियों के स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि स्टेशन पर कचरा भंडारण क्षेत्र की स्थिति अत्यंत दयनीय है और इसमें तत्काल सुधार की आवश्यकता है।
समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि रानी कमलापति रेलवे स्टेशन की वर्तमान कचरा प्रबंधन प्रणाली को अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक बनाने की जरूरत है। रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा व्यवस्था कचरे के निपटान के लिए पर्याप्त नहीं है, जिससे परिसर में गंदगी का अंबार लग रहा है।
पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा
एनजीटी ने सुनवाई के दौरान इस बात पर जोर दिया कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का पालन करना न केवल एक कानूनी बाध्यता है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता बनाए रखना संबंधित विभागों की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जीवन जीने का अधिकार सीधे तौर पर स्वच्छ वातावरण से जुड़ा हुआ है। ऐसे में रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थल पर कचरे का कुप्रबंधन नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन माना जा सकता है। एनजीटी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करें।
सुधार के लिए सख्त निर्देश
एनजीटी ने रेलवे प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि वे संयुक्त समिति द्वारा बताई गई खामियों को प्राथमिकता के आधार पर दूर करें। कचरा भंडारण क्षेत्र को व्यवस्थित करने और पटरियों के किनारे से कचरा हटाने के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है। ट्रिब्यूनल की इस सख्ती के बाद अब रेलवे प्रशासन को अपनी सफाई व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन करने होंगे।
आने वाले समय में एनजीटी इस मामले की निगरानी जारी रखेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि स्टेशन परिसर में स्वच्छता मानकों का पालन हो रहा है या नहीं। रेलवे अधिकारियों को अब अपनी कार्यप्रणाली में सुधार कर एनजीटी के निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा, अन्यथा उन्हें भविष्य में और अधिक सख्त कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

Editor in chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
