निवाड़ी: एएनएम कर्मियों का बड़ा प्रदर्शन, लंबित मांगों को लेकर सीएमएचओ को सौंपा ज्ञापन
निवाड़ी जिले में एएनएम कार्यकर्ताओं ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। संयुक्त एएनएम एसोसिएशन ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) को ज्ञापन सौंपा है।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

सात दिन का अल्टीमेटम और मांगों की फेहरिस्त
निवाड़ी जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली एएनएम (ANM) कार्यकर्ताओं ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संयुक्त एएनएम एसोसिएशन के बैनर तले कार्यकर्ताओं ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) को एक ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने प्रशासन को सात दिनों का स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है। संघ का कहना है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे चरणबद्ध तरीके से आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
एसोसिएशन की प्रमुख मांगों में संविदा एएनएम का नियमितीकरण, प्रोत्साहन राशि (पीबीआई) का अधिकार और काम के लिए 5जी टैबलेट की उपलब्धता शामिल है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि लंबे समय से इन मांगों को लेकर आश्वासन तो दिए गए, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इस उपेक्षापूर्ण रवैये के कारण कर्मचारियों में गहरा असंतोष व्याप्त है।
अतिरिक्त कार्य का बोझ और प्रोत्साहन राशि का विवाद
एएनएम कार्यकर्ताओं ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि मैदानी स्तर पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकांश महत्वपूर्ण कार्य उन्हीं के कंधों पर हैं। टीकाकरण, एमआरआई, आईआई, यूविन, एनसीडी, निक्षय पोर्टल पर डेटा एंट्री, अर्ली रजिस्ट्रेशन और हाई रिस्क प्रेगनेंसी की पहचान जैसे जटिल कार्य एएनएम द्वारा ही किए जा रहे हैं। उनका आरोप है कि इतनी मेहनत के बावजूद इन कार्यों से जुड़ी प्रोत्साहन राशि सीधे सीएचओ (CHO) को दी जा रही है, जिससे एएनएम वर्ग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।
संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि इन कार्यों की समीक्षा और उच्च अधिकारियों द्वारा मिलने वाले नोटिस के कारण एएनएम को मानसिक दबाव का सामना करना पड़ता है। इसके अतिरिक्त, जिन हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर सीएचओ पदस्थ नहीं हैं, वहां का पूरा अतिरिक्त कार्यभार भी एएनएम ही संभालती हैं। बावजूद इसके, उन्हें इस अतिरिक्त श्रम का कोई भुगतान नहीं किया जाता, जो कि पूरी तरह से अनुचित है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है असर
एएनएम संवर्ग ने स्पष्ट किया है कि वे स्वास्थ्य सेवाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में अपनी भूमिका को लेकर सजग हैं, लेकिन अपनी वाजिब मांगों की अनदेखी वे अब और बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने सात दिनों के भीतर उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। इस स्थिति में जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं।
वर्तमान में एएनएम कार्यकर्ताओं का यह प्रदर्शन स्वास्थ्य विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। यदि समय रहते बातचीत के जरिए समाधान नहीं निकाला गया, तो टीकाकरण और अन्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य अभियानों पर इसका सीधा असर पड़ना तय है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!