चूरू में मोबाइल खोने के बाद बैंक खाते पर साइबर ठगों का हमला, 19,600 रुपये उड़ाए
चूरू में एक व्यक्ति का मोबाइल गुम होने के बाद साइबर अपराधियों ने उसके बैंक खाते से 19,600 रुपये निकाल लिए। सिम ब्लॉक करने में हुई देरी का फायदा उठाकर ठगों ने इस वारदात को अंजाम दिया।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

मोबाइल गुम होते ही सक्रिय हुए साइबर अपराधी
राजस्थान के चूरू जिले में साइबर ठगी का एक नया मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति को अपना मोबाइल फोन खोना काफी महंगा पड़ गया। वार्ड संख्या 30 में रहने वाले 44 वर्षीय पीड़ित का फोन कहीं गुम हो गया था। इस दौरान सिम कार्ड को तुरंत ब्लॉक न करवा पाना उनके लिए मुसीबत का सबब बन गया। अपराधियों ने इसी अंतराल का लाभ उठाकर उनके बैंक खाते से 19,600 रुपये की अवैध निकासी कर ली।
घटना की जानकारी मिलते ही पीड़ित ने स्थानीय पुलिस को सूचित किया। पुलिस की साइबर डेस्क ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच शुरू की। शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हुआ कि सिम कार्ड बंद कराने की प्रक्रिया में हुई देरी के कारण ठगों को खाते तक पहुंचने का मौका मिल गया। डिजिटल युग में मोबाइल का खोना केवल एक उपकरण का नुकसान नहीं, बल्कि बैंक खातों और व्यक्तिगत डेटा के लिए भी बड़ा खतरा बन गया है।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई से 5,000 रुपये सुरक्षित
कोतवाली थाना के साइबर डेस्क इंचार्ज सुनील कुमार धायल ने बताया कि पीड़ित की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तत्काल प्रभाव से संबंधित बैंक और पेमेंट गेटवे से संपर्क साधा। पुलिस की तत्परता के चलते खाते से निकाली गई कुल राशि में से 5,000 रुपये को होल्ड करवा दिया गया है, जिससे वे ठगों के पास पहुंचने से बच गए हैं। शेष राशि की रिकवरी के लिए पुलिस तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराधी अक्सर ऐसे मौकों की तलाश में रहते हैं जहां उन्हें सिम कार्ड या मोबाइल का एक्सेस मिल सके। जैसे ही किसी का फोन खोता है, अपराधी उस सिम का उपयोग ओटीपी (OTP) प्राप्त करने और बैंकिंग ट्रांजेक्शन को अधिकृत करने के लिए करने लगते हैं। इस मामले में भी ठगों ने इसी तकनीक का इस्तेमाल किया।
सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाएं
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल खोने की स्थिति में सबसे पहले अपने मोबाइल ऑपरेटर को कॉल करके सिम कार्ड को तुरंत ब्लॉक करवाना चाहिए। इसके बाद अपने बैंक को सूचित करें ताकि खाते से होने वाले ट्रांजेक्शन पर रोक लगाई जा सके। यदि संभव हो, तो बैंक के मोबाइल ऐप को दूसरे सुरक्षित डिवाइस से तुरंत लॉग आउट कर देना चाहिए ताकि अपराधी आपके वित्तीय डेटा तक न पहुंच सकें।
इसके अलावा, अपने फोन में हमेशा स्क्रीन लॉक, फिंगरप्रिंट या फेस आईडी का उपयोग करें ताकि फोन मिलने वाला व्यक्ति आसानी से आपके ऐप्स तक न पहुंच सके। सिम कार्ड पर भी पिन लॉक लगाना एक अतिरिक्त सुरक्षा परत प्रदान करता है। यदि आपके साथ ऐसी कोई घटना होती है, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या नजदीकी पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज कराएं।
फिलहाल, चूरू पुलिस इस मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है। पुलिस का कहना है कि डिजिटल लेनदेन करते समय सतर्कता ही बचाव है। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि मोबाइल फोन के गुम होने पर लापरवाही बरतना भारी वित्तीय नुकसान का कारण बन सकता है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे अपने डिजिटल उपकरणों की सुरक्षा को लेकर अधिक जागरूक रहें।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!