नवादा: 17 साल पुराने हत्याकांड में 5 दोषियों को उम्रकैद, कोर्ट ने सुनाया फैसला
नवादा में 17 साल पुराने हत्या के मामले में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय उपेंद्र कुमार की अदालत ने पांच दोषियों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने अकबरपुर थाना क्षेत्र के कुडिलपुर बंदरकोल गांव निवासी राज कुमार यादव, दुलारचंद यादव, राजेंद्र यादव, आजाद यादव और प्रगास यादव को हत्या का दोषी पाया।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

न्याय में देरी पर लगा विराम, 17 साल बाद आया फैसला
बिहार के नवादा जिले में एक बहुचर्चित हत्या मामले में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय उपेंद्र कुमार की अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने 17 साल पुराने इस मामले में पांच लोगों को दोषी करार देते हुए सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला अकबरपुर थाना क्षेत्र के कुडिलपुर बंदरकोल गांव से जुड़ा है, जहां लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा की जा रही थी।
अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए व्यक्तियों में राज कुमार यादव, दुलारचंद यादव, राजेंद्र यादव, आजाद यादव और प्रगास यादव शामिल हैं। इन सभी पर हत्या का आरोप सिद्ध हुआ है। सजा के साथ ही अदालत ने प्रत्येक दोषी पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड का भुगतान न करने की स्थिति में दोषियों को अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
क्या थी 24 जनवरी 2009 की घटना?
घटना का विवरण देते हुए अभियोजन पक्ष ने बताया कि 24 जनवरी 2009 को कुडिलपुर बंदरकोल निवासी रामकृपाल यादव अपने चाचा चांदो यादव के साथ नवादा में थे। हजारीबाग जाने के लिए वाहन न मिलने पर वे रात के समय नवीन नगर स्थित अपनी मौसी के घर जा रहे थे। इसी दौरान बड़ी दरगाह के पास खुरी नदी के निकट घात लगाए बैठे हमलावरों ने उन पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं।
इस हमले में चांदो यादव के सिर में गोली लगी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। रामकृपाल यादव किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से भागने में सफल रहे। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी और परिवार ने लंबे समय तक न्याय के लिए संघर्ष किया।
पुलिस की जांच और प्रोटेस्ट परिवाद
शुरुआती दौर में नगर थाना में मामला दर्ज किया गया था, लेकिन पुलिस ने जांच के बाद सभी आरोपियों को निर्दोष बताते हुए अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। पुलिस की इस कार्रवाई से असंतुष्ट होकर पीड़ित रामकृपाल यादव ने अदालत में प्रोटेस्ट परिवाद दायर किया। इसी परिवाद के आधार पर मामले की सुनवाई आगे बढ़ी और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपियों को दोषी पाया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने गवाहों के बयानों और उपलब्ध भौतिक साक्ष्यों का बारीकी से विश्लेषण किया। अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक दीपक कुमार ने प्रभावी पैरवी की, जिसके चलते दोषियों को सजा सुनिश्चित हो सकी। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
सजा और कानूनी प्रावधान
हत्या के मामले में आजीवन कारावास के अतिरिक्त, अदालत ने धारा 147 के तहत भी दोषियों को दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। इस धारा के तहत प्रत्येक दोषी पर तीन हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया गया है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो लंबे समय से कानून की प्रक्रिया से बचने का प्रयास कर रहे थे।
इस मामले का निपटारा होने से पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है। 17 वर्षों तक चली लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार दोषियों को सलाखों के पीछे भेज दिया गया है। नवादा की इस अदालत का फैसला न केवल पीड़ित परिवार के लिए न्याय का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि साक्ष्यों के आधार पर न्याय की प्रक्रिया देर से ही सही, लेकिन अपना काम करती है।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!