नर्मदापुरम नगरपालिका में करोड़ों का राजस्व घोटाला: सॉफ्टवेयर से डेटा डिलीट कर हड़पे 7.78 करोड़ रुपये

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

नर्मदापुरम नगरपालिका में बड़ा वित्तीय गबन
मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम स्थित नगरपालिका में एक बड़े राजस्व घोटाले का खुलासा हुआ है। पिछले कई वर्षों से चल रहे इस वित्तीय हेरफेर में करीब 7.78 करोड़ रुपये से अधिक की राशि गायब होने की पुष्टि हुई है। यह घोटाला मुख्य रूप से वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2022-23 के बीच अंजाम दिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोतवाली पुलिस ने नगरपालिका के दो प्रमुख कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी और गबन का मामला दर्ज किया है।
यह कार्रवाई नगरपालिका उपाध्यक्ष अभय वर्मा द्वारा की गई शिकायत के बाद शुरू हुई थी। इसके बाद भोपाल स्थित संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने मामले की गहन पड़ताल की। जांच रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने राजस्व विभाग के एआरआई हरीश गोस्वामी और कंप्यूटर ऑपरेटर भुवन मेहता को नामजद आरोपी बनाया है।
सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ और फर्जी रसीदों का खेल
जांच में सामने आया है कि नगरपालिका के भीतर एक संगठित सिंडिकेट सक्रिय था। आरोपियों ने करदाताओं को टैक्स, किराए और अन्य मदों की रसीदें तो जारी कीं, लेकिन बाद में सॉफ्टवेयर से डेटा डिलीट कर दिया या प्रविष्टियों को निरस्त कर दिया। इस तरह से वसूले गए करोड़ों रुपये सरकारी खजाने में जमा करने के बजाय निजी तौर पर हड़प लिए गए। घोटाले को छिपाने के लिए बिना किसी सक्षम अधिकारी की स्वीकृति के सॉफ्टवेयर को बंद करने का प्रयास भी किया गया।
घोटाले का एक उदाहरण वार्ड 30 के निवासी इमरतलाल उर्फ मुन्ना ग्वाला की शिकायत से मिलता है। उन्होंने कॉलोनाइजर पंजीकरण शुल्क के रूप में 50,000 रुपये नकद जमा किए थे। भुवन मेहता की यूजर आईडी से उन्हें नगरपालिका की सील लगी रसीद भी दी गई, लेकिन वह पैसा कभी भी नगरपालिका के मुख्य कोष तक नहीं पहुंचा। यह स्पष्ट करता है कि रसीदें जारी करने के बावजूद सरकारी राजस्व का गबन किया जा रहा था।
पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई
कोतवाली थाना प्रभारी गौरव बुंदेला ने बताया कि लगभग एक साल पहले पुलिस अधीक्षक को इस मामले की शिकायत मिली थी। एसडीओपी द्वारा की गई प्रारंभिक जांच के बाद अब एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस अब इस पूरे मामले की तकनीकी और वित्तीय जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस सिंडिकेट में और कौन-कौन शामिल है और गबन की गई राशि का उपयोग कहां किया गया।
नगरपालिका के सीएमओ वैभव देशमुख ने भी इस बात की पुष्टि की है कि पुलिस की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही राजस्व अमले के इन दो कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि यह एक पुराना प्रकरण है और प्रशासन अब इस मामले में कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई कर रहा है।
प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे सवाल
इस घोटाले ने नगरपालिका के कामकाज और आंतरिक लेखा-जोखा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इतने लंबे समय तक करोड़ों रुपये का गबन होते रहना और किसी को भनक न लगना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। जांच समिति की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि जांच के दौरान मुख्य आरोपी को ही समिति का मुखिया बनाने का प्रयास किया गया था, जो मामले को दबाने की कोशिश की ओर इशारा करता है।
फिलहाल, पुलिस की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां या खुलासे होने की संभावना है। स्थानीय प्रशासन ने अब नगरपालिका के वित्तीय रिकॉर्ड्स की ऑडिट प्रक्रिया को और अधिक सख्त करने के संकेत दिए हैं ताकि भविष्य में इस तरह की धांधली को रोका जा सके।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
