मध्य प्रदेश में सरकारी फिजूलखर्ची पर लगाम: अफसरों के विदेश दौरों पर रोक, इकोनॉमी क्लास में होगी हवाई यात्रा
State government implements strict fiscal discipline measures banning foreign tours and luxury expenses for officials. विकास कार्यों और वित्तीय मैनेजमेंट के लिए बार-बार कर्ज ले रही सरकार अब वित्तीय सुशासन पर सख्त हो गई है। इसी के चलते राज्य सरकार ने विदेश दौरों पर रोक के साथ अफसरों के इकोनॉमी क्लास में हवाई सफर की गाइड लाइन दो साल के लिए लागू कर दी है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के वित्तीय प्रबंधन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से सरकारी खर्चों पर कड़ा नियंत्रण लागू कर दिया है। वित्त विभाग द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अगले दो वित्तीय वर्षों के लिए फिजूलखर्ची पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। यह निर्णय राज्य सरकार द्वारा विकास कार्यों के लिए लिए जा रहे कर्ज और वित्तीय घाटे को नियंत्रित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
विदेश दौरों और वीआईपी खर्चों पर सख्त पाबंदी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब सरकारी खर्च पर अफसरों के विदेश दौरों पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। केवल अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में ही विशेष अनुमति के साथ यात्रा की जा सकेगी। इसके अलावा, वीआईपी संस्कृति को बढ़ावा देने वाले खर्चों जैसे कि सरकारी कैलेंडर, डायरी, महंगे उपहार और स्वागत समारोहों के आयोजन पर भी रोक लगा दी गई है। यह आदेश राज्य के सभी विभागों, निगमों, मंडलों, सार्वजनिक उपक्रमों और विश्वविद्यालयों पर तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
यात्रा नियमों में बदलाव करते हुए सरकार ने निर्देश दिए हैं कि सरकारी काम से होने वाली हवाई यात्राएं अब केवल इकोनॉमी क्लास में ही की जा सकेंगी। बिजनेस या अन्य उच्च श्रेणी में यात्रा की अनुमति अब नहीं होगी। यह नियम बजट आवंटन को व्यवस्थित रखने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 और 2027-28 के दौरान प्रभावी रहेगा।
वर्चुअल बैठकों और व्हीकल पूलिंग को बढ़ावा
महंगे होटलों में आयोजित होने वाली कार्यशालाओं, बैठकों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर भी रोक लगा दी गई है। सरकार ने निर्देश दिए हैं कि इन कार्यक्रमों के लिए सरकारी भवनों का उपयोग किया जाए या फिर वर्चुअल माध्यमों व वेबिनार को प्राथमिकता दी जाए। कार्यालयों की आंतरिक साज-सज्जा पर होने वाले अनावश्यक खर्चों को भी बंद करने के निर्देश दिए गए हैं।
परिवहन खर्च को कम करने के लिए सरकार ने 'व्हीकल पूलिंग' नीति को अनिवार्य कर दिया है। इसके तहत अब एक ही वाहन का उपयोग दो या अधिक अधिकारी साझा रूप से करेंगे। साथ ही, अनुबंधित गाड़ियों की संख्या को सीमित करने और अतिरिक्त प्रभार वाले पदों के वाहनों का पुनर्वितरण करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके।
कंसल्टेंसी पर रोक और राजस्व बढ़ाने पर जोर
वित्तीय अनुशासन को और अधिक मजबूत बनाने के लिए नई कंसल्टेंसी सेवाओं के अनुबंधों पर भी रोक लगा दी गई है। सरकार ने निगमों और मंडलों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने लाभांश की अधिकतम राशि राज्य शासन के खाते में जमा कराएं। इससे सरकारी खजाने को मजबूती मिलेगी और विकास कार्यों के लिए धन की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।
गौरतलब है कि इससे पूर्व सामान्य प्रशासन विभाग ने भी मितव्ययिता से संबंधित निर्देश जारी किए थे, जिन्हें अब वित्त विभाग ने बजट अनुशासन के तहत अधिक व्यापक और अनिवार्य रूप से लागू कर दिया है। सरकार का मानना है कि इन कदमों से न केवल सरकारी खजाने पर बोझ कम होगा, बल्कि प्रशासन में जवाबदेही और पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
