मोतिहारी तेजाब कांड: 12 साल बाद कोर्ट का बड़ा फैसला, जमीन विवाद में भाई को उम्रकैद
Bihar Motihari 2014 acid attack case verdict after 12 years. पूर्वी चंपारण जिले के घोड़ासहन थाना क्षेत्र में वर्ष 2014 में हुए चर्चित तेजाब कांड में 12 साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। सत्र न्यायाधीश-21 रमेश रंजन की अदालत ने आरोपी विजय राय को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

12 साल बाद मिला न्याय: तेजाब हमले के दोषी को आजीवन कारावास
बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के घोड़ासहन थाना क्षेत्र में वर्ष 2014 में हुए एक वीभत्स तेजाब कांड मामले में सत्र न्यायालय ने 12 साल बाद अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सत्र न्यायाधीश-21 रमेश रंजन की अदालत ने आरोपी विजय राय को दोषी करार देते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला लंबे समय से कानूनी प्रक्रिया में उलझा हुआ था, लेकिन अब अदालत के इस निर्णय ने पीड़ितों को न्याय की उम्मीद पूरी की है।
घटना की जड़ में पुश्तैनी जमीन का विवाद था। पीड़ित अभय कुमार यादव के अनुसार, वर्ष 2008 में उनके पिता ने परिवार की जमीन को तीनों भाइयों के बीच बराबर बांट दिया था। हालांकि, बड़े भाई विजय राय लगातार अभय पर अपने हिस्से की जमीन उसके नाम करने का दबाव बना रहे थे। जब अभय ने इस अनुचित मांग को मानने से इनकार कर दिया, तो विजय राय ने अपने ससुराल पक्ष के लोगों के साथ मिलकर एक खतरनाक साजिश रची।
साजिश के तहत किया गया हमला
आरोपी विजय राय ने अपने साले, ससुर और पत्नी के साथ मिलकर अभय के परिवार को निशाना बनाया। साजिश के तहत, आरोपी ने अभय की पत्नी पर तेजाब फेंक दिया। हमले की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब पीड़ित की चीख सुनकर परिवार के अन्य सदस्य उन्हें बचाने के लिए दौड़े, तो हमलावरों ने उन पर भी तेजाब डाल दिया। इस घटना में कुल चार लोग गंभीर रूप से झुलस गए थे।
पीड़ित पक्ष का यह भी आरोप है कि हमले के दौरान आरोपी ने उन पर गोली चलाने का भी प्रयास किया था, हालांकि वह इसमें सफल नहीं हो सका। घटना के तुरंत बाद सभी घायलों को इलाज के लिए सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी जान बचाने के लिए लंबा उपचार चला। इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी थी।
लंबी कानूनी लड़ाई और अदालत का रुख
घटना के बाद घोड़ासहन थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई और पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जांच पूरी होने के बाद मामला सत्र न्यायालय में पहुंचा, जहां पिछले 12 वर्षों तक सुनवाई चली। इस दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने साक्ष्य और गवाह अदालत के समक्ष पेश किए। पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता पप्पू सिंह ने बताया कि अदालत ने सभी सबूतों और गवाहों के बयानों का बारीकी से विश्लेषण करने के बाद विजय राय को दोषी पाया।
अदालत के इस फैसले से पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है। परिवार का कहना है कि इतने वर्षों के संघर्ष के बाद उन्हें आखिरकार न्याय मिला है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के जघन्य अपराधों में सजा का यह फैसला समाज में एक कड़ा संदेश भेजेगा और अपराधियों में कानून का डर पैदा करेगा।
यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह न्याय व्यवस्था में आम जनता के भरोसे को भी मजबूत करता है। तेजाब जैसे घातक हथियारों का इस्तेमाल कर किसी के जीवन को बर्बाद करने वालों के खिलाफ अदालत की यह सख्ती भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने में सहायक सिद्ध हो सकती है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
