मथुरा: प्रेम विवाह की रंजिश में महिला की हत्या, 12 साल पुराने मामले में 6 दोषियों को उम्रकैद
Mathura court delivers verdict in 12-year-old murder case over love marriage dispute. मथुरा में 12 वर्ष पुराने चर्चित हत्याकांड में मथुरा की अदालत ने बुधवार को फैसला सुनाते हुए छह दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायालय संख्या-4 अनुराग शर्मा ने प्रेम-प्रसंग और कोर्ट मैरिज से उपजी रंजिश में घर में घुसकर महिला की हत्या करने के मामले में सभी आरोपियों को दोषी करार दिया।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में एक दशक से अधिक समय से लंबित चले आ रहे चर्चित हत्याकांड में अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। बुधवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायालय संख्या-4 के न्यायाधीश अनुराग शर्मा ने 12 साल पुराने मामले में छह लोगों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला प्रेम विवाह के बाद उपजी रंजिश और बदले की भावना से जुड़ा हुआ था।
क्या था पूरा मामला?
घटना 15 जून 2014 की है, जब थाना कोतवाली क्षेत्र के लक्ष्मीनगर इलाके में एक परिवार को निशाना बनाया गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, मुख्य आरोपी रामगोपाल की बेटी याचना ने विजयपाल सिंह के बेटे अभिषेक यादव के साथ प्रेम विवाह कर लिया था। इस विवाह से रामगोपाल का परिवार बेहद नाराज था और इसी रंजिश के चलते उन्होंने विजयपाल सिंह के परिवार को सबक सिखाने की योजना बनाई।
आरोप है कि घटना वाले दिन रामगोपाल अपने बेटों लोकेश, विकास, चन्द्रशेखर उर्फ चन्दू, अर्जुन और अपने सहयोगी राजू उर्फ राजेन्द्र के साथ अवैध हथियारों से लैस होकर विजयपाल सिंह के घर पहुंचा। आरोपियों ने घर में घुसते ही अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी, जिससे इलाके में दहशत फैल गई।
गोलीबारी में महिला की गई जान
इस हमले में विजयपाल सिंह की 45 वर्षीय पत्नी लक्ष्मी देवी को गोली लग गई। गोली सीधे उनके चेहरे पर लगी, जिससे उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। हमले के दौरान परिवार के अन्य सदस्य भी निशाने पर थे, जिनमें विजयपाल का बेटा देवेन्द्र सिंह बाल-बाल बच गया। वारदात के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए थे।
पुलिस ने इस मामले में हत्या, जानलेवा हमला और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया था। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने गहन विवेचना की और साक्ष्यों को जुटाकर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया।
अदालत का फैसला और साक्ष्य
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मजबूती से अपना पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान कुल 9 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। इसके अलावा पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मौके से बरामद 32 बोर का अवैध तमंचा, कारतूस और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों को अदालत के समक्ष पेश किया गया। इन पुख्ता सबूतों के आधार पर न्यायाधीश ने सभी छह आरोपियों को दोषी माना।
अदालत ने सभी दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उन पर अर्थदंड भी लगाया गया है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (ADGC) कृष्ण कांत पाठक ने बताया कि जुर्माने की राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा पीड़ित परिवार को मुआवजे के रूप में दिया जाएगा।
सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस ने सभी छह दोषियों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया है। 12 साल बाद आए इस फैसले ने पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद पूरी की है, हालांकि इस घटना ने प्रेम विवाह के विरोध में होने वाली हिंसा की भयावहता को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
