मंडला: जर्जर स्कूल भवन के कारण सरपंच के घर में लग रही कक्षाएं, 8 साल से मरम्मत का इंतजार
Mandla Jantipur Kodratola school building condition dangerous, classes held at Sarpanch house. मंडला जिले की जंतीपुर ग्राम पंचायत के कोड़राटोला प्राथमिक शाला का भवन जर्जर होने के कारण बच्चों की कक्षाएं सरपंच के घर में संचालित की जा रही हैं। भवन की छत से प्लास्टर गिरने और बारिश में पानी टपकने से स्कूल प्रबंधन ने सुरक्षा के मद्देनजर यह फैसला लिया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

जान जोखिम में डाल रहे मासूम, जर्जर भवन में पढ़ाई असंभव
मंडला जिले के जंतीपुर ग्राम पंचायत अंतर्गत आने वाले कोड़राटोला प्राथमिक शाला की स्थिति बेहद दयनीय हो गई है। स्कूल का भवन इतना जर्जर हो चुका है कि वहां बच्चों को बैठाना किसी बड़े खतरे को न्योता देने जैसा है। छत से लगातार प्लास्टर गिर रहा है और बारिश के दौरान पानी टपकने से कमरों के भीतर बैठना भी मुश्किल हो गया है। बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्कूल प्रबंधन ने मजबूरी में कक्षाओं को स्कूल परिसर से बाहर स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है।
वर्तमान में, इस प्राथमिक शाला में लगभग 30 छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। स्कूल के तीनों कमरों की स्थिति इतनी खराब है कि वहां पढ़ाई का माहौल बनाना तो दूर, सुरक्षित खड़े रहना भी चुनौतीपूर्ण है। प्रबंधन ने बच्चों के भविष्य और उनकी सुरक्षा को देखते हुए फिलहाल सरपंच के घर में ही अस्थायी रूप से कक्षाएं संचालित करना शुरू कर दिया है।
आठ वर्षों से मरम्मत की बाट जोह रहा स्कूल
ग्रामीणों और अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल भवन की यह दुर्दशा कोई नई नहीं है। पिछले आठ वर्षों से यह भवन धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील हो रहा है। स्थानीय लोगों ने कई बार जिला प्रशासन और संबंधित शिक्षा विभाग के अधिकारियों को लिखित आवेदन देकर मरम्मत की गुहार लगाई है, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की ओर से हमेशा बजट का अभाव बताकर मामले को टाल दिया जाता है, जिससे मरम्मत का कार्य आज तक शुरू नहीं हो सका है।
सरपंच संत लाल मरावी ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो, इसलिए उन्होंने अपने घर के दरवाजे शिक्षा के लिए खोल दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था केवल अस्थायी है। बारिश का मौसम बीत जाने के बाद बच्चों को किसी अन्य सुरक्षित सरकारी भवन में शिफ्ट करने की योजना बनाई जाएगी, ताकि उनकी पढ़ाई सुचारू रूप से चल सके।
जिले में 580 स्कूलों की स्थिति चिंताजनक
कोड़राटोला प्राथमिक शाला केवल एक उदाहरण है। मंडला जिले में शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, करीब 580 प्राथमिक और मिडिल स्कूल ऐसे हैं जिनके भवन जर्जर अवस्था में हैं। इन स्कूलों में पढ़ने वाले सैकड़ों बच्चों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। कई स्थानों पर तो बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्रों या अन्य सरकारी भवनों में बिठाकर पढ़ाया जा रहा है, जो बुनियादी शिक्षा के ढांचे पर बड़े सवाल खड़े करता है।
शिक्षा के अधिकार के तहत बच्चों को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा मिलना उनका मौलिक अधिकार है, लेकिन मंडला के इन स्कूलों की स्थिति प्रशासन की उदासीनता को दर्शाती है। अब देखना यह होगा कि कब तक प्रशासन इन जर्जर भवनों की सुध लेता है और कब तक बच्चों को एक सुरक्षित पक्का स्कूल भवन नसीब हो पाएगा।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
