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सुल्तानपुर एफआईआर मामला: हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर लगाई रोक, विवेचक को केस डायरी के साथ किया तलब

Lucknow High Court stays arrest in Sultanpur FIR case, summons investigation officer. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सुल्तानपुर के करौंदी कला थाने में दर्ज एक एफआईआर को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए याची धीरज के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायालय ने विवेचक को पूरी केस डायरी के साथ तलब किया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

17 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें 937
सुल्तानपुर एफआईआर मामला: हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर लगाई रोक, विवेचक को केस डायरी के साथ किया तलब
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हाईकोर्ट से याची को बड़ी राहत

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सुल्तानपुर जिले के करौंदी कला थाने में दर्ज एक एफआईआर के मामले में याची धीरज को बड़ी राहत प्रदान की है। न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए याची के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई और गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। इस आदेश के बाद पुलिस फिलहाल याची को गिरफ्तार नहीं कर सकेगी।

न्यायालय ने मामले की गंभीरता को संज्ञान में लेते हुए विवेचक को अगली सुनवाई के दौरान पूरी केस डायरी के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई 22 जुलाई को निर्धारित की गई है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

याची के अधिवक्ता ने न्यायालय के समक्ष तर्क दिया कि पुलिस ने मामले में निष्पक्ष जांच नहीं की है। आरोप है कि घटना के समय डायल 112 पर दी गई सूचना और वास्तविक शिकायत को पुलिस ने पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। याचिका में दावा किया गया है कि संबंधित पुलिसकर्मी ने स्वयं वादी बनकर एफआईआर दर्ज की और सूचना देने वाले व्यक्ति सहित दोनों पक्षों को आरोपी बना दिया।

याचिकाकर्ता का कहना है कि पुलिस की इस एकतरफा कार्रवाई से वास्तविक पीड़ितों और घटना के प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। इस दलील ने पुलिस की जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

एसपी की उपस्थिति और न्यायालय का रुख

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने पूर्व में सुल्तानपुर की पुलिस अधीक्षक चारू निगम को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में तलब किया था। सुनवाई के दौरान एसपी ने याचिका में लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें निराधार बताया। उन्होंने पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई का बचाव किया।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने याची को राहत देते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगाई। न्यायालय का यह रुख स्पष्ट करता है कि मामले की गहन जांच की आवश्यकता है, जिसके लिए विवेचक को केस डायरी के साथ बुलाया गया है।

क्या है पूरा मामला?

घटना के विवरण के अनुसार, विवाद के बाद सबसे पहले डायल 112 पर सूचना दी गई थी और थाने में लिखित तहरीर भी सौंपी गई थी। पुलिस ने घायल धीरज को इलाज के लिए करौंदी कला स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया था, लेकिन आरोप है कि उसकी शिकायत पर मुकदमा दर्ज करने के बजाय पुलिस ने स्वयं वादी बनकर एफआईआर दर्ज कर ली।

इस घटनाक्रम के बाद पीड़ित पक्ष ने न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अब 22 जुलाई को होने वाली सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकेगा कि पुलिस की केस डायरी में क्या तथ्य दर्ज हैं और न्यायालय इस मामले में आगे क्या दिशा-निर्देश जारी करता है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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