लखनऊ: मेयर के विकास कार्यों के दावों पर भाजपा पार्षद ने उठाए सवाल, हस्ताक्षर करने से किया इनकार
Lucknow BJP councillor protests against Mayor Sushma Kharkwal regarding pending development works. फैजुल्लागंज-4 से पार्षद रामू कन्नौजिया ने इसका विरोध करते हुए समर्थन में सिग्नेचर नहीं किया। हमारे वार्ड में मेयर एक भी बार सर्वे करने के लिए नहीं आई हैं।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

लखनऊ नगर निगम में वार्डों के विकास कार्यों को लेकर भाजपा पार्षदों और मेयर सुषमा खर्कवाल के बीच खींचतान बढ़ती जा रही है। हाल ही में वार्डों में काम न मिलने की शिकायतों के बाद मेयर ने अपने कैंप कार्यालय में भाजपा पार्षदों को तलब किया था। इस दौरान मेयर ने पिछले तीन वर्षों में किए गए कार्यों का ब्यौरा प्रस्तुत करते हुए पार्षदों से सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने को कहा।
पार्षद का आरोप: प्रस्ताव दिए, पर धरातल पर काम नहीं
फैजुल्लागंज-4 के पार्षद रामू कनौजिया ने मेयर द्वारा पेश की गई सूची पर हस्ताक्षर करने से स्पष्ट इनकार कर दिया। उनका आरोप है कि उन्होंने पिछले तीन वर्षों में अपने वार्ड की बदहाल सड़कों के लिए 30 से अधिक प्रस्ताव दिए, लेकिन एक भी सड़क का निर्माण नहीं हुआ। पार्षद ने यह भी दावा किया कि मेयर ने कभी उनके वार्ड का दौरा तक नहीं किया है।
रामू कनौजिया के अनुसार, जब उन्होंने मेयर के सामने सफाई कर्मचारियों की कमी और विकास कार्यों की अनदेखी का मुद्दा उठाया, तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा कि मेयर ने कार्यकर्ताओं के माध्यम से काम कराने का दावा किया, जिसे उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया और कागजों पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया।
मेयर का पक्ष: करोड़ों के काम हुए, आरोप निराधार
दूसरी ओर, मेयर सुषमा खर्कवाल ने इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फैजुल्लागंज-4 वार्ड में पिछले तीन वर्षों में नगर निगम और जलकल विभाग के माध्यम से लगभग 25.45 करोड़ रुपये की लागत से 140 विकास कार्य संपन्न कराए गए हैं। मेयर ने कहा कि विकास कार्यों का आवंटन आवश्यकता के आधार पर किया जाता है।
मेयर ने उन पार्षदों पर भी निशाना साधा जिन्होंने नगर आयुक्त और प्रमुख सचिव को शिकायत भेजी थी। उन्होंने कहा कि शिकायत करने वाले कुछ पार्षद न तो नगर निगम कार्यालय आते हैं और न ही उनके कैंप कार्यालय में अपनी समस्या लेकर पहुंचे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लखनऊ में वार्ड विकास निधि की सुविधा अन्य नगर निगमों की तुलना में बेहतर है।
फंड आवंटन पर विवाद और संगठन की भूमिका
विवाद की मुख्य जड़ 15वें वित्त आयोग और अवस्थापना निधि से जारी 68 करोड़ रुपये का फंड है। पार्षदों का आरोप है कि शहर के 36 वार्डों को इस फंड से वंचित रखा गया है। नाराज पार्षदों का कहना है कि यदि उनके वार्डों में काम नहीं हुआ, तो वे आगामी चुनावों में जनता के बीच क्या जवाब देंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि मेयर द्वारा गिनाए गए कार्यों में अन्य मदों के काम भी शामिल कर लिए गए हैं।
पार्षद मुकेश सिंह मोंटी ने पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के संसदीय क्षेत्र के वार्डों की तुलना में अन्य क्षेत्रों को अधिक प्राथमिकता दी जा रही है। पार्षदों ने इस मामले की शिकायत भाजपा महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी और प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज सिंह से भी की है।
महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी ने स्वीकार किया कि फंड आवंटन में असमानता एक गलत परंपरा है। उन्होंने पार्षदों को आश्वासन दिया है कि पार्टी इस मामले को गंभीरता से ले रही है और जल्द ही इसका समाधान निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार का भेदभाव स्वीकार्य नहीं है और इस पर उचित चर्चा की जाएगी।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
