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कुरुक्षेत्र: नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दोषी को उम्रकैद, कोर्ट ने लगाया भारी जुर्माना

कुरुक्षेत्र में 16 वर्षीय नाबालिग का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म करने के करीब सात साल पुराने मामले में कुरुक्षेत्र की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (बलात्कार व पोक्सो एक्ट) ने आरोपी को कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर कुल 1 लाख 60 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

17 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
कुरुक्षेत्र: नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दोषी को उम्रकैद, कोर्ट ने लगाया भारी जुर्माना
मूल स्रोत

हरियाणा के कुरुक्षेत्र में सात साल पुराने एक गंभीर मामले में फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए आरोपी को दोषी करार दिया है। अदालत ने 16 वर्षीय नाबालिग के अपहरण और उसके साथ दुष्कर्म करने के जुर्म में संजू उर्फ जसविंद्र को कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस फैसले के साथ ही कोर्ट ने दोषी पर 1 लाख 60 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जो पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

क्या था पूरा मामला

घटना की शुरुआत 10 जनवरी 2019 को हुई थी, जब लाडवा थाना क्षेत्र से एक 16 वर्षीय किशोरी अचानक लापता हो गई थी। पीड़िता की मां ने दो दिन बाद 12 जनवरी 2019 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि लाडवा निवासी संजू उर्फ जसविंद्र उनकी बेटी को घर के पास से जबरन उठाकर ले गया था। परिजनों ने काफी खोजबीन के बाद आरोपी के घर से किशोरी को बरामद किया और उसे वापस घर ले आए।

घर लौटने के बाद पीड़िता ने अपने परिजनों को आपबीती सुनाई। उसने बताया कि आरोपी ने उसे अगवा करने के बाद उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया। इस खुलासे के बाद परिवार ने तुरंत पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अपहरण और दुष्कर्म की धाराओं के साथ-साथ पोक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।

जांच और कानूनी प्रक्रिया

मामले की जांच तत्कालीन डीएसपी रमेश गुलिया के नेतृत्व में की गई। जांच के दौरान पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया और न्यायालय में धारा 164 के तहत उसके बयान दर्ज किए गए। साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने 16 जनवरी 2019 को आरोपी संजू उर्फ जसविंद्र को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद पुलिस ने मामले का चालान अदालत में पेश किया, जिसके बाद सुनवाई फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट में शुरू हुई।

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पीड़िता के बयानों, चिकित्सकीय साक्ष्यों और अन्य गवाहों को मजबूती से अदालत के समक्ष रखा। जिला न्यायवादी जयमल सिंह ने बताया कि अदालत ने सभी सबूतों और गवाहों के बयानों का बारीकी से अवलोकन किया। इन ठोस साक्ष्यों के आधार पर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने आरोपी को दोषी माना और उसे कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

न्याय की जीत

यह मामला सात वर्षों तक कानूनी प्रक्रिया से गुजरा। फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वारा सुनाया गया यह फैसला न केवल पीड़िता को न्याय दिलाने वाला है, बल्कि समाज में एक कड़ा संदेश भी देता है। अदालत द्वारा लगाया गया 1.60 लाख रुपये का जुर्माना भी इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है। कानून के जानकारों का मानना है कि इस तरह के मामलों में त्वरित सुनवाई और सख्त सजा से अपराधियों में डर पैदा होता है।

इस फैसले के बाद क्षेत्र में चर्चा है कि कैसे एक नाबालिग के साथ हुए जघन्य अपराध में पुलिस और न्यायपालिका ने मिलकर काम किया। पीड़िता के परिजनों ने अदालत के इस निर्णय पर संतोष व्यक्त किया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे ट्रायल के दौरान सुरक्षा और गोपनीयता के मानकों का पालन किया गया, ताकि पीड़िता को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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