झुंझुनूं: आशा सहयोगिनियों का कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन, राज्य कर्मचारी का दर्जा और वेतन वृद्धि की मांग
Asha Sahyogini union protest at collectorate for ANM quota, employee status and salary hike. आशा सहयोगिनी यूनियन (सीटू) जिला कमेटी के नेतृत्व में शुक्रवार को आशा सहयोगिनियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

राजस्थान के झुंझुनूं जिले में शुक्रवार को आशा सहयोगिनियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। आशा सहयोगिनी यूनियन (सीटू) जिला कमेटी के नेतृत्व में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाओं ने हिस्सा लिया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने अपनी मांगों का एक ज्ञापन जिला कलेक्टर को सौंपा, जिसे मुख्यमंत्री तक भेजने की मांग की गई।
राज्य कर्मचारी का दर्जा और वेतन वृद्धि की मांग
प्रदर्शन के दौरान आशा सहयोगिनियों ने स्पष्ट किया कि उन्हें लंबे समय से उपेक्षित रखा जा रहा है। उनकी प्रमुख मांगों में उन्हें राज्य कर्मचारी का दर्जा प्रदान करना और न्यूनतम 26 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन निर्धारित करना शामिल है। इसके अलावा, उन्होंने मांग की है कि सेवानिवृत्ति के समय उन्हें पेंशन का लाभ दिया जाए और 50 लाख रुपये की एकमुश्त सहायता राशि प्रदान की जाए। महिलाओं का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन उन्हें उचित आर्थिक सुरक्षा नहीं मिल रही है।
यूनियन की ओर से यह भी मांग की गई है कि आशा सहयोगिनियों से केवल उनके निर्धारित मूल कार्य ही कराए जाएं। उन्हें अन्य अतिरिक्त कार्यों या ओबीसी सर्वे जैसे कामों में न उलझाया जाए। उन्होंने समय पर बकाया मानदेय का भुगतान सुनिश्चित करने की भी पुरजोर मांग उठाई है।
एएनएम भर्ती में आरक्षण और कार्य का बोझ
अपनी मांगों के क्रम में आशा सहयोगिनियों ने एएनएम भर्ती प्रक्रिया में अनुभवी कार्यकर्ताओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की मांग रखी है। उनका तर्क है कि वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं में जमीनी स्तर पर काम कर रही महिलाओं को इस भर्ती में प्राथमिकता मिलनी चाहिए। प्रदर्शन के दौरान तेज बारिश भी हुई, लेकिन इसके बावजूद आशा सहयोगिनियां अपनी मांगों पर अडिग रहीं और कलेक्ट्रेट के बाहर डटी रहीं।
यूनियन प्रतिनिधि मंजू लालपुरिया ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे पहले भी कई बार ज्ञापन सौंप चुकी हैं और हड़तालें कर चुकी हैं, लेकिन अब तक उनकी सुनवाई नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक सामान्य मजदूर की दिहाड़ी भी उनसे अधिक है, जबकि उन्हें केवल 150 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है, जो कि उनका आर्थिक शोषण है।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शन में सुशीला, बृजेश देवी और ममता सहित जिले भर की कई आशा सहयोगिनियां शामिल हुईं। यूनियन ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए मजबूर होंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब वे केवल आश्वासन से संतुष्ट नहीं होंगी और आने वाले समय में आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।
फिलहाल, जिला प्रशासन की ओर से ज्ञापन प्राप्त कर लिया गया है, लेकिन आशा सहयोगिनियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों को पूरा करने की प्रक्रिया शुरू नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। इस प्रदर्शन ने स्वास्थ्य विभाग के कामकाज पर भी असर डाला है और अब सबकी निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
