कानपुर: चुनाव नजदीक आते ही नेताओं में मची होड़, सरकारी दफ्तरों और थानों में वीडियो पॉलिटिक्स तेज
उप्र विधानसभा चुनाव का समय नजदीक आते ही शहर की राजनीति में सोशल इंजीनियरिंग के साथ सोशल मीडिया की जंग भी तेज हो गई है। खुद को जनता का हितैषी साबित करने की होड़ में नेता अब सरकारी दफ्तरों और थानों तक पहुंच रहे हैं।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

कानपुर में सियासी सरगर्मी: सात दिनों में चार वीडियो ने बढ़ाई हलचल
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही कानपुर की राजनीति में एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है। शहर के नेता अब अपनी सक्रियता दर्ज कराने के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं। पिछले एक सप्ताह में कानपुर के अलग-अलग इलाकों से चार ऐसे वीडियो सामने आए हैं, जिनमें विधायक और टिकट के दावेदार सरकारी दफ्तरों या थानों में अधिकारियों के साथ तीखी बहस करते नजर आ रहे हैं। यह घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि जनता के बीच अपनी पैठ बनाने के लिए नेता अब सीधे सरकारी तंत्र को चुनौती देने की रणनीति अपना रहे हैं।
इन वीडियो में केवल विपक्षी दलों के नेता ही नहीं, बल्कि सत्ताधारी दल के विधायक भी शामिल हैं। कोई बिजली विभाग के अधिकारियों को फोन पर चेतावनी दे रहा है, तो कोई थाने में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है। इन सभी गतिविधियों को बाकायदा रिकॉर्ड करके सोशल मीडिया पर साझा किया जा रहा है, ताकि जनता के बीच यह संदेश जाए कि वे उनकी समस्याओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
थाने से लेकर बिजली दफ्तर तक नेताओं का 'दबाव'
14 सितंबर को आर्यनगर से सपा विधायक अमिताभ बाजपेई का एक वीडियो चर्चा का विषय बना। वे हरबंश मोहाल थाने की सिरकी मोहाल चौकी पहुंचे थे, जहां एक युवक की पिटाई के मामले में उन्होंने पुलिस अधिकारियों से कड़े सवाल किए। विधायक के हाथ में एक पट्टा था, जिसे उन्होंने पिटाई का जरिया बताया। इस दौरान पुलिस अधिकारियों के साथ उनकी तीखी नोकझोंक हुई, जिसका वीडियो तेजी से वायरल हुआ।
वहीं, 16 सितंबर को बिठूर से भाजपा विधायक अभिजीत सिंह सांगा का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वे चलती कार से बिजली विभाग के अधिकारी को फोन पर खरी-खोटी सुनाते दिखे। मंधना क्षेत्र में बिजली की समस्या को लेकर उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि व्यवस्था नहीं सुधरी तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जनता केवल उनकी बातें सुनने के लिए नहीं बनी है।
अगले ही दिन, 17 सितंबर को बिल्हौर के भाजपा विधायक राहुल बच्चा सोनकर सांभी सब-स्टेशन के औचक निरीक्षण पर पहुंचे। वहां मौजूद कर्मचारियों से उन्होंने बिजली कटौती और शेड्यूल को लेकर सवाल-जवाब किए। यह पूरा निरीक्षण भी कैमरे में कैद किया गया, जो बाद में सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बना।
पुराने वीडियो और चुनावी बिसात
इस कड़ी में 19 सितंबर को गोविंद नगर विधानसभा से सपा के पूर्व प्रत्याशी सम्राट विकास का एक पुराना वीडियो भी सामने आया। इसमें वे गुजैनी थाने में एक सब-इंस्पेक्टर से बहस करते दिख रहे हैं। हालांकि, यह वीडियो करीब चार महीने पुराना बताया जा रहा है, लेकिन चुनाव के माहौल में इसके वायरल होने से राजनीतिक गलियारों में फिर से चर्चा शुरू हो गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव नजदीक आते ही नेताओं का यह 'वीडियो स्टाइल' एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। सरकारी दफ्तरों में जाकर अधिकारियों को घेरना और उसे सोशल मीडिया पर डालना, मतदाताओं को यह दिखाने का एक तरीका है कि नेता उनकी समस्याओं के प्रति कितने गंभीर और मुखर हैं।
आने वाले दिनों में इस तरह की घटनाओं में और तेजी आने की संभावना है। जैसे-जैसे चुनाव की तारीखें करीब आएंगी, कानपुर की राजनीति में सोशल इंजीनियरिंग के साथ-साथ इस तरह की 'डिजिटल सक्रियता' का प्रभाव और अधिक देखने को मिल सकता है। फिलहाल, इन वीडियो के जरिए नेता अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!