झालावाड़ के किसान ने संतरों के बीच शुरू की ड्रैगन फ्रूट की खेती, 25 साल तक मिलेगी बंपर पैदावार
झालावाड़ जिले के मिश्रोली निवासी किसान मुकेश पाटीदार ने अपने जेईएन बेटे की सलाह पर खेती-बाड़ी में कृषि वैज्ञानिकों जैसा काम कर दिखाया है। वे बरसों से पारंपरिक फसलों की खेती करते रहे, मगर अब सफल रूप से बागवानी कर रहे हैं।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

राजस्थान के झालावाड़ जिले में कृषि के क्षेत्र में एक नया नवाचार देखने को मिला है। मिश्रोली गांव के रहने वाले किसान मुकेश पाटीदार ने पारंपरिक खेती से हटकर बागवानी में एक साहसी कदम उठाया है। उन्होंने अपने संतरे के बगीचे में खाली पड़ी जमीन का उपयोग करते हुए ड्रैगन फ्रूट (कमलम) की खेती शुरू की है। यह प्रयोग न केवल सफल रहा है, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
बेटे की सलाह और तकनीक का सही मेल
इस अनूठी पहल की शुरुआत मुकेश पाटीदार के बेटे राहुल पाटीदार की सलाह पर हुई। राहुल ने अपनी पोस्टिंग के दौरान डीग में ड्रैगन फ्रूट की खेती को करीब से देखा था। पिता ने बेटे के सुझाव पर अमल करते हुए यूट्यूब के माध्यम से इस फसल की बारीकियों को समझा। अक्टूबर 2025 में उन्होंने हैदराबाद से सियाम रेड (टाइप-सी) किस्म के 400 पौधे मंगवाकर अपने संतरे के बगीचे में रोपित किए। आज ये पौधे तीन साल के हो चुके हैं और सितंबर महीने तक इनमें फल पककर तैयार होने की उम्मीद है।
ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए मुकेश पाटीदार ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है। उन्होंने खेत में आरसीसी पोल लगाकर उन पर रिंग का ढांचा तैयार किया है, जिससे पौधों की शाखाओं को फैलने में मदद मिलती है। प्रति पोल चार पौधे लगाए गए हैं और सिंचाई के लिए ड्रिप इरिगेशन सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है। इस पूरी व्यवस्था पर लगभग दो लाख रुपये की लागत आई है।
कम पानी और अधिक मुनाफा
ड्रैगन फ्रूट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे बहुत कम पानी और सामान्य मिट्टी में भी उगाया जा सकता है। यह पौधा 45 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान को आसानी से सहन कर लेता है। पाटीदार ने बताया कि एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच 8 से 10 फीट और लाइनों के बीच 18 फीट की दूरी रखी गई है, जिससे बीच की खाली जगह में अन्य नकदी फसलें भी ली जा सकती हैं।
उत्पादन की बात करें तो शुरुआती वर्षों में एक पौधे से लगभग एक किलो फल मिलने की उम्मीद है। हालांकि, जैसे-जैसे पौधे परिपक्व होंगे, सात से आठ साल बाद एक पौधा 8 से 10 किलो तक फल देने में सक्षम होगा। बाजार में ड्रैगन फ्रूट की भारी मांग है और इसकी कीमत 200 रुपये प्रति किलो से अधिक रहती है। सबसे बड़ी बात यह है कि एक बार लगाने के बाद यह पौधा अगले 20 से 25 वर्षों तक लगातार फल देता रहता है।
देखभाल और भविष्य की संभावनाएं
खेती में फंगस की समस्या को रोकने के लिए किसान ने जैविक तरीकों को प्राथमिकता दी है। वे छाछ, राख और वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग कर रहे हैं, ताकि फलों की गुणवत्ता बनी रहे। गंभीर स्थिति में ही रासायनिक कीटनाशकों का छिड़काव किया जाता है। कोटा, जयपुर और इंदौर जैसे बड़े शहरों के साथ-साथ विदेशों में भी इस फल की बढ़ती मांग को देखते हुए मुकेश पाटीदार का यह प्रयोग आर्थिक रूप से काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।
झालावाड़ जैसे संतरे के गढ़ में ड्रैगन फ्रूट की सफल खेती ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही तकनीक और सूझबूझ के साथ काम किया जाए, तो किसान अपनी आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं। पाटीदार की यह सफलता आने वाले समय में जिले के अन्य किसानों को भी बागवानी की ओर प्रेरित करेगी।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!