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जमुई में सांपों के रक्षक बने बंटी सिंह: एक कॉल पर पहुंच बचाते हैं हजारों जानें

जमुई में कभी गांव या मोहल्ले में सांप निकलने की खबर मिलते ही लोगों में अफरा-तफरी मच जाती थी। डर और अज्ञानता के कारण अधिकांश लोग सांप को देखते ही मार देते थे।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

8 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
जमुई में सांपों के रक्षक बने बंटी सिंह: एक कॉल पर पहुंच बचाते हैं हजारों जानें
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डिजिटल तकनीक से बदल रही है सांपों के प्रति लोगों की सोच

बिहार के जमुई जिले में सांपों को लेकर फैली दहशत और अज्ञानता अब धीरे-धीरे कम हो रही है। पहले मोहल्लों में सांप दिखने पर लोग उसे मार देते थे, लेकिन अब डिजिटल युग में सूचना तंत्र मजबूत होने से स्थिति बदली है। मोबाइल फोन, व्हाट्सएप और सोशल मीडिया के जरिए स्नेक कैचरों को तुरंत सूचना मिल जाती है, जिससे सांपों को मारने के बजाय उन्हें सुरक्षित रेस्क्यू करने का चलन बढ़ा है।

इस बदलाव के पीछे जमुई के मलयपुर निवासी बंटी सिंह का बड़ा योगदान है। बंटी सिंह पिछले कुछ वर्षों में 1000 से अधिक सांपों को सुरक्षित पकड़कर उन्हें जीवनदान दे चुके हैं। जैसे ही उन्हें किसी इलाके से सांप होने की सूचना मिलती है, वह अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचकर वैज्ञानिक तरीके से रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम देते हैं।

रेस्क्यू के बाद सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़े जाते हैं सांप

बंटी सिंह का मुख्य उद्देश्य केवल इंसानों की सुरक्षा करना ही नहीं, बल्कि वन्यजीवों को बचाना भी है। रेस्क्यू किए गए सांपों को वह जमुई-लक्ष्मीपुर मार्ग पर स्थित गंगटा के जंगलों में छोड़ देते हैं। उनका मानना है कि सांपों को मारना पर्यावरण के लिए नुकसानदेह है, जबकि सही प्रशिक्षण और समझ के साथ उन्हें सुरक्षित स्थान पर छोड़ना ही एकमात्र सही विकल्प है।

सोशल मीडिया के माध्यम से बंटी सिंह लोगों को सांपों की पहचान, जहरीले और गैर-जहरीले सांपों के बीच अंतर और सांप के काटने पर प्राथमिक उपचार की जानकारी भी देते हैं। उनके इन प्रयासों का सकारात्मक असर यह हुआ है कि अब लोग सांप दिखने पर घबराने के बजाय उन्हें सूचित करना बेहतर समझते हैं।

पर्यावरण संतुलन के लिए सांपों का संरक्षण जरूरी

पर्यावरणविदों के अनुसार, सांप पारिस्थितिकी तंत्र का एक अनिवार्य हिस्सा हैं। ये खेतों में चूहों और अन्य हानिकारक जीवों की संख्या को नियंत्रित रखते हैं, जिससे फसलों का बचाव होता है। यदि सांपों की संख्या में भारी गिरावट आती है, तो इसका सीधा असर कृषि और प्राकृतिक संतुलन पर पड़ सकता है। इसलिए, सांपों का संरक्षण मानव सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि सांप पकड़ने का कार्य अत्यंत जोखिम भरा होता है। आम लोगों को बिना किसी प्रशिक्षण या सुरक्षा उपकरणों के सांप को पकड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। जहरीले सांपों के प्रति छोटी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। ऐसी स्थिति में हमेशा प्रशिक्षित स्नेक कैचर की मदद लेना ही समझदारी है।

तकनीक का सही उपयोग और भविष्य की राह

बंटी सिंह जैसे स्नेक कैचर यह साबित कर रहे हैं कि तकनीक का उपयोग केवल संचार के लिए ही नहीं, बल्कि वन्यजीवों के संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए भी किया जा सकता है। उनकी यह पहल न केवल जमुई के लोगों के लिए प्रेरणा है, बल्कि जैव विविधता को बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।

आने वाले समय में इस तरह के प्रयासों को और अधिक बढ़ावा देने की आवश्यकता है ताकि लोग सांपों को दुश्मन न मानकर उन्हें पर्यावरण का मित्र समझें। एक कॉल पर मदद के लिए पहुंचने वाली यह व्यवस्था न केवल सांपों की जान बचा रही है, बल्कि समाज में जागरूकता का नया अध्याय भी लिख रही है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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