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साइबर ठगी पर जबलपुर हाईकोर्ट सख्त: तीन राज्यों के डीजीपी को किया तलब, जांच में देरी पर जताई नाराजगी

High Court summons DGPs over cyber fraud case pending investigation. परेशान होकर उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले पर अगली सुनवाई 21 जुलाई 2026 को होगी।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

15 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 679
साइबर ठगी पर जबलपुर हाईकोर्ट सख्त: तीन राज्यों के डीजीपी को किया तलब, जांच में देरी पर जताई नाराजगी
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साइबर अपराधों की धीमी जांच पर हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी

देशभर में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों और पुलिस की सुस्त जांच प्रक्रिया को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। जबलपुर की एक सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी के साथ हुई 6.24 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पश्चिम बंगाल, झारखंड और असम के पुलिस महानिदेशकों (DGP) को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि साइबर अपराध की जांच में हर एक सेकंड कीमती है और यदि पुलिस त्वरित कार्रवाई नहीं करती है, तो अपराधी आसानी से कानून की पकड़ से बाहर निकल जाते हैं।

जस्टिस हिमांशु जोशी की एकल पीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और दूरसंचार विभाग को भी पक्षकार बनाने का आदेश दिया है। कोर्ट का मानना है कि साइबर अपराधियों को पकड़ने के लिए राज्यों के बीच रियल-टाइम समन्वय और तकनीकी तालमेल का होना अनिवार्य है, जिसके अभाव में जांच का दायरा सिमट कर रह जाता है।

क्या है पूरा मामला और पीड़िता की व्यथा

जबलपुर के गोरा बाजार की निवासी चैताली मित्रा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर न्याय की गुहार लगाई थी। उन्होंने बताया कि क्रेडिट कार्ड अपडेट करने के नाम पर अज्ञात साइबर अपराधियों ने उनके बैंक खाते से 6.24 लाख रुपये उड़ा लिए थे। पीड़िता ने स्थानीय पुलिस से लेकर एसपी स्तर तक शिकायत दर्ज कराई, लेकिन संतोषजनक कार्रवाई न होने पर उन्हें हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। सुनवाई के दौरान जबलपुर एसपी संपत उपाध्याय ने कोर्ट को बताया कि जांच में बैंक नोडल एजेंसियों से जानकारी मिलने में ही तीन से पांच दिन का समय लग जाता है, जिससे अपराधी सबूत मिटाने में सफल हो जाते हैं।

पुलिस ने कोर्ट को यह भी अवगत कराया कि अपराधी टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं और फर्जी खातों के जरिए रकम का लेनदेन कर रहे हैं। जांच के दौरान मुख्य संदिग्ध की लोकेशन असम में ट्रेस हुई है, जिसके बाद कोर्ट ने असम के डीजीपी को भी मामले में शामिल करने का निर्देश दिया है। पुलिस के अनुसार, दूसरे राज्यों की एजेंसियों से सहयोग मिलने में देरी होने के कारण जांच की गति धीमी पड़ जाती है।

अगली सुनवाई में जवाबदेह होंगे आला अधिकारी

हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पश्चिम बंगाल, झारखंड और असम के डीजीपी को 21 जुलाई 2026 को अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया है। इन अधिकारियों को अपने-अपने राज्यों में चल रही जांच की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करनी होगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि साइबर ठगी के मामलों में पुलिस की कार्यप्रणाली में सुधार और अंतर-राज्यीय समन्वय को मजबूत करना अब समय की मांग है।

इस मामले में अगली सुनवाई 21 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है। तब तक के लिए कोर्ट ने भारत सरकार के स्टैंडिंग काउंसिल और आरबीआई के अधिवक्ताओं को आवश्यक निर्देश प्राप्त करने के लिए कहा है ताकि वे अगली सुनवाई में कोर्ट को प्रभावी समाधान सुझा सकें। यह आदेश साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़े बदलाव की दिशा में देखा जा रहा है, जहां अब पुलिस को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम और त्वरित होने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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