इंदौर: करोड़ों की लागत से बना सुभाष स्कूल बना कचरा डिपो, जर्जर इमारत में छात्रों का भविष्य दांव पर

मोहम्मद नवेद
एडिटर

12 साल पुरानी इमारत की बदहाली
इंदौर के बड़ा गणपति स्थित शासकीय सुभाष उच्चतर माध्यमिक विद्यालय इन दिनों अपनी बदहाली के आंसू रो रहा है। महज 12 साल पहले 5.60 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च करके बनाई गई यह आधुनिक इमारत अब जर्जर अवस्था में पहुंच चुकी है। स्कूल के अंदर और बाहर की दीवारों से प्लास्टर उखड़ने लगा है, जिससे छात्रों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। स्कूल के कर्मचारियों का कहना है कि निर्माण के समय से ही छत से पानी टपकने की समस्या बनी हुई थी, जो समय के साथ और भी गंभीर हो गई है।
स्कूल परिसर की सबसे बड़ी समस्या नगर निगम का अघोषित कब्जा है। स्कूल के दूसरे गेट के पास के हिस्से को निगम ने 'मटेरियल यार्ड' में तब्दील कर दिया है। यहां दिनभर डंपरों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का आना-जाना लगा रहता है, जिससे परिसर में गिट्टी और रेत के ढेर लगे रहते हैं। विडंबना यह है कि इसी स्कूल के ग्राउंड फ्लोर पर जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) का कार्यालय भी स्थित है, इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी इस अव्यवस्था को अनदेखा कर रहे हैं।
पढ़ाई पर शोर और धूल का साया
स्कूल के मुख्य द्वार के अलावा बाकी का पूरा बाहरी हिस्सा अब पार्किंग स्टैंड बन चुका है। निगम के वर्कशॉप के कारण यहां हमेशा वाहनों की कतार लगी रहती है। कक्षाओं में बैठे छात्रों को खिड़की से बाहर पढ़ाई के माहौल के बजाय धूल उड़ते और भारी वाहनों की आवाजाही दिखाई देती है। शोर-शराबे के कारण शिक्षकों के लिए कक्षाएं संचालित करना मुश्किल हो गया है। छात्रों का कहना है कि दिनभर चलने वाली निर्माण सामग्री की लोडिंग-अनलोडिंग से पढ़ाई में लगातार व्यवधान पैदा होता है।
अव्यवस्थाओं का सीधा असर छात्रों की संख्या पर पड़ा है। चार साल पहले तक इस स्कूल में करीब 1200 छात्र शिक्षा ग्रहण करते थे, लेकिन सुविधाओं के अभाव और जर्जर भवन के डर से अब यह संख्या घटकर महज 400 रह गई है। यानी पिछले कुछ वर्षों में स्कूल ने अपने 66 प्रतिशत छात्र खो दिए हैं। 1976 में स्थापित इस स्कूल को 2013-14 में नई इमारत में शिफ्ट किया गया था, लेकिन आज यह अपनी ही बदहाली का शिकार है।
अधिकारियों का आश्वासन
इस मामले पर नगर निगम की शिक्षा समिति के अध्यक्ष नंदकिशोर पहाड़िया ने कहा कि वे जल्द ही अधिकारियों के साथ मौके का मुआयना करेंगे। उन्होंने आश्वासन दिया है कि छतों की मरम्मत का कार्य प्राथमिकता पर कराया जाएगा और परिसर में जमा नगर निगम के मटेरियल को अन्यत्र शिफ्ट किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि बच्चों की पढ़ाई में किसी भी तरह की बाधा नहीं आने दी जाएगी।
वहीं, जिला शिक्षा अधिकारी शौर्य मल्होत्रा ने भी स्कूल की समस्याओं को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि डीईओ कार्यालय इसी परिसर में होने के कारण वे खुद भी इन समस्याओं से रूबरू हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि निगम के कब्जे वाले हिस्से की जांच कराई जाएगी और जल्द ही सभी समस्याओं का निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा। अब देखना यह है कि इन आश्वासनों के बाद स्कूल की स्थिति में कब तक सुधार आता है।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!