इंदौर: जर्जर भवन के कारण सेंट्रल लाइब्रेरी में छात्रों की एंट्री पर रोक, पढ़ाई के लिए भटक रहे विद्यार्थी

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

सुरक्षा कारणों से लिया गया निर्णय
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) की सेंट्रल लाइब्रेरी में अध्ययनरत छात्रों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भवन के जर्जर होने के कारण प्रथम वर्ष के छात्रों के प्रवेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इसके साथ ही, सेल्फ स्टडी के लिए आने वाले करीब 100 छात्रों को भी लाइब्रेरी परिसर से बाहर कर दिया गया है, जिससे वे अपनी पढ़ाई के लिए वैकल्पिक स्थान तलाशने को मजबूर हैं।
लाइब्रेरी के एक बड़े हिस्से की स्थिति काफी खराब है। विशेषज्ञों की एक पैनल ने भवन का निरीक्षण करने के बाद इसे असुरक्षित घोषित किया है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि जिस हॉल में 100 छात्र सेल्फ स्टडी कर रहे थे, वह हिस्सा कभी भी गिर सकता है। छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने इस क्षेत्र को पूरी तरह बंद करने का निर्णय लिया है।
नवीनीकरण और वैकल्पिक व्यवस्था
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, लाइब्रेरी के दो अलग-अलग कक्षों का नवीनीकरण कार्य शुरू किया गया है। कुलपति डॉ. राकेश सिंघई ने बताया कि सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है, इसलिए छात्रों को कुछ समय के लिए धैर्य रखना होगा। वर्तमान में लाइब्रेरी के एक सुरक्षित हिस्से में रिसर्च सेंटर बनाया जा रहा है, जहाँ दो नए कक्ष तैयार किए जा रहे हैं। इन कक्षों के ऊपरी हिस्से में छात्रों को बैठने की जगह दी जाएगी, लेकिन इस प्रक्रिया में तीन से चार महीने का समय लग सकता है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रथम वर्ष के छात्रों को भी जल्द ही सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। हालांकि, जब तक यह नवीनीकरण कार्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक छात्रों को अपनी पढ़ाई के लिए स्वयं वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी। विश्वविद्यालय का अनुमान है कि स्थिति सामान्य होने में लगभग छह से आठ महीने का समय लग सकता है।
नई बिल्डिंग का निर्माण और भविष्य की योजनाएं
डीएवीवी परिसर में ही सेंट्रल लाइब्रेरी के लिए एक नई बिल्डिंग का निर्माण कार्य चल रहा है। विश्वविद्यालय का दावा है कि इस नई इमारत को तैयार होने में अधिकतम एक साल का समय लगेगा। नई बिल्डिंग तैयार होने के बाद लाइब्रेरी को वहां शिफ्ट कर दिया जाएगा, जिसके साथ आईटी सेंटर को भी उसी परिसर में स्थानांतरित करने की योजना है। यह एक महत्वपूर्ण कदम है क्योंकि वर्तमान लाइब्रेरी का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा जर्जर हो चुका है।
हैरानी की बात यह है कि नई लाइब्रेरी बिल्डिंग का प्रस्ताव पिछले पांच वर्षों से कार्यपरिषद की बजट बैठकों में पारित हो रहा था, लेकिन निर्माण कार्य कुछ महीने पहले ही शुरू हो पाया। वर्तमान लाइब्रेरी की व्यवस्था भी काफी अव्यवस्थित है, जहाँ पीएचडी स्कॉलर्स, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों और नियमित विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग ब्लॉक का अभाव है।
विश्वविद्यालय में हर साल सीयूईटी (CUET) के माध्यम से 2900 से अधिक, नॉन-सीयूईटी कोर्सेज में 1300 से अधिक और जेईई, गेट व सीमैट जैसे प्रवेश परीक्षाओं के जरिए 600 से अधिक छात्र दाखिला लेते हैं। इतनी बड़ी संख्या में छात्रों के लिए लाइब्रेरी की सुविधा का बाधित होना एक बड़ी चुनौती बन गया है, जिसे प्रशासन अब चरणबद्ध तरीके से सुलझाने का प्रयास कर रहा है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
