मध्य प्रदेश के इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, 34 अन्य इलाकों में हल्की फुहारों के आसार
Heavy rain alert in Chhatarpur and Panna, light rain in 34 districts. मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना में अगले 24 घंटे के अंदर हेवी रेन यानी, भारी बारिश का अलर्ट है। वहीं, जबलपुर-ग्वालियर समेत 34 जिलों में बूंदाबांदी हो सकती है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

छतरपुर और पन्ना में भारी बारिश की चेतावनी
मध्य प्रदेश में मानसून की सक्रियता के बीच मौसम विभाग ने छतरपुर और पन्ना जिलों के लिए अगले 24 घंटों के भीतर भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। राज्य के अन्य हिस्सों में भी मौसम का मिजाज बदला हुआ है। जबलपुर और ग्वालियर सहित प्रदेश के 34 जिलों में हल्की बूंदाबांदी होने की संभावना जताई गई है, जबकि भोपाल, इंदौर और उज्जैन में फिलहाल मौसम के साफ रहने का अनुमान है।
मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार, राज्य के आसपास चार साइक्लोनिक सर्कुलेशन और एक टर्फ लाइन सक्रिय है। इस मौसमी प्रभाव के कारण शनिवार को भोपाल और नर्मदापुरम समेत कई क्षेत्रों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश दर्ज की गई। रविवार को भी इसी तरह की स्थिति बने रहने की उम्मीद है।
बारिश के आंकड़ों में कमी और मानसून की स्थिति
प्रदेश में मानसून की बारिश अब तक सामान्य से 15 प्रतिशत कम दर्ज की गई है। जुलाई के शुरुआती नौ दिनों में किसी भी जिले में अत्यधिक भारी बारिश नहीं होने के कारण यह आंकड़ा लगातार नीचे आया है। राज्य में अब तक 247 मिमी बारिश हुई है, जबकि सामान्य आंकड़ा 291 मिमी का है। पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश की कमी 26 प्रतिशत तक पहुंच गई है, वहीं पश्चिमी हिस्से में यह कमी 5 प्रतिशत है।
देवास जिला वर्तमान में सबसे अधिक बारिश वाला जिला बना हुआ है, जहां सामान्य से 102 प्रतिशत अधिक पानी गिर चुका है। इसके विपरीत, आलीराजपुर में मानसून की स्थिति सबसे कमजोर है, जहां सामान्य से 74 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। भोपाल, इंदौर, हरदा और सीहोर जैसे जिलों में भी बारिश का स्तर संतोषजनक बना हुआ है।
प्रमुख शहरों में बारिश का ऐतिहासिक रिकॉर्ड
मध्य प्रदेश के बड़े शहरों में मानसून का अलग-अलग प्रभाव देखने को मिलता है। इंदौर में 24 घंटे में सर्वाधिक 11.5 इंच बारिश का रिकॉर्ड 1913 में बना था। वहीं, भोपाल में जुलाई के दौरान औसतन 15 दिन बारिश होती है, और 1986 में यहां एक महीने में 41 इंच तक बारिश दर्ज की गई थी। जबलपुर में जुलाई का औसत 17 इंच है, जो राज्य के प्रमुख शहरों में सबसे अधिक है।
ग्वालियर में अन्य बड़े शहरों की तुलना में बारिश का आंकड़ा कम रहता है। पिछले एक दशक में यहां छह बार ऐसा हुआ है जब महीने की कुल बारिश 8 इंच से कम रही हो। हालांकि, जुलाई का महीना प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि राज्य की कुल वार्षिक बारिश का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा इसी महीने में बरसता है।
आगामी दिनों का पूर्वानुमान
मौसम विभाग के अनुसार, रायसेन, विदिशा, बैतूल, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, दमोह, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में हल्की बारिश की संभावना है। दूसरी ओर, भोपाल, राजगढ़, सीहोर, हरदा, इंदौर, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर और देवास में मौसम के शुष्क रहने की उम्मीद है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
