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हरियाणा लेबर वेलफेयर बोर्ड घोटाला: CBI ने दो अधिकारियों को किया गिरफ्तार, 50 करोड़ के गबन का है मामला

हरियाणा के बहुचर्चित IDFC फर्स्ट बैंक सरकारी फंड घोटाले में CBI ने पहली बड़ी गिरफ्तारी की है। जांच एजेंसी ने हरियाणा लेबर वेलफेयर बोर्ड (HLWB) के अकाउंट्स ऑफिसर जुगल किशोर और संविदा अकाउंटेंट अमित कुमार को गिरफ्तार किया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

8 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
हरियाणा लेबर वेलफेयर बोर्ड घोटाला: CBI ने दो अधिकारियों को किया गिरफ्तार, 50 करोड़ के गबन का है मामला
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हरियाणा सरकारी फंड घोटाले में CBI की बड़ी कार्रवाई

हरियाणा के बहुचर्चित सरकारी फंड घोटाले की जांच में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। जांच एजेंसी ने हरियाणा लेबर वेलफेयर बोर्ड (HLWB) से जुड़े करोड़ों रुपये के गबन के मामले में दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में बोर्ड के अकाउंट्स ऑफिसर जुगल किशोर और संविदा पर कार्यरत अकाउंटेंट अमित कुमार शामिल हैं। इन दोनों पर सरकारी धन के दुरुपयोग और हेराफेरी के गंभीर आरोप हैं।

यह गिरफ्तारी राज्य में हुए व्यापक बैंकिंग फ्रॉड की जांच का हिस्सा है। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि लेबर वेलफेयर बोर्ड के खातों से करीब 50 करोड़ रुपये की राशि को गलत तरीके से निकाला गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह पूरी प्रक्रिया एक सोची-समझी साजिश के तहत अंजाम दी गई थी, जिसमें सरकारी तंत्र और निजी संस्थाओं के बीच मिलीभगत की आशंका है।

504 करोड़ के बैंकिंग फ्रॉड का है पूरा मामला

CBI के अनुसार, यह गिरफ्तारी केवल 50 करोड़ रुपये तक सीमित नहीं है, बल्कि यह करीब 504 करोड़ रुपये के एक बड़े बैंकिंग घोटाले का हिस्सा है। जांच में खुलासा हुआ है कि हरियाणा सरकार के आठ अलग-अलग विभागों के सरकारी फंड को निशाना बनाया गया था। इन पैसों को फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और अवैध डेबिट ट्रांजैक्शन के जरिए खातों से निकाला गया। इसके बाद, इस राशि को विभिन्न शेल कंपनियों के खातों में ट्रांसफर कर दिया गया, ताकि धन के स्रोत को छिपाया जा सके।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए हरियाणा सरकार ने पहले राज्य विजिलेंस एवं एंटी करप्शन ब्यूरो से जांच करवाई थी, लेकिन बाद में इसे CBI को सौंप दिया गया। केंद्रीय एजेंसी ने मामले की कमान संभालते हुए अब तक अपनी जांच का दायरा काफी बढ़ा दिया है। इस पूरे मामले में अब तक 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, जो इस घोटाले की व्यापकता को दर्शाता है।

जांच के दायरे में बैंक अधिकारी और निजी व्यक्ति

CBI की अब तक की जांच में कई स्तरों पर भ्रष्टाचार की परतें खुली हैं। चार्जशीट में जिन 17 लोगों को नामजद किया गया है, उनमें बैंकिंग क्षेत्र के 6 अधिकारी शामिल हैं, जो IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक से जुड़े हैं। इसके अलावा, हरियाणा सरकार के 3 कर्मचारी, 2 कंपनियां और 6 निजी व्यक्ति भी इस मामले में आरोपी बनाए गए हैं। इन सभी पर सरकारी खजाने को चूना लगाने और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंकिंग प्रणाली का दुरुपयोग करने का आरोप है।

जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन शेल कंपनियों के पीछे असल में कौन लोग थे और इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड कौन है। गिरफ्तार किए गए दोनों अधिकारियों से पूछताछ के बाद कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है। CBI का मुख्य फोकस उन रास्तों को ट्रैक करना है जिनसे होकर सरकारी पैसा निजी कंपनियों तक पहुंचा।

आगे की कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया

फिलहाल, गिरफ्तार किए गए जुगल किशोर और अमित कुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। CBI इस बात की पुष्टि करने में जुटी है कि क्या इस घोटाले में और भी उच्च अधिकारी शामिल हैं। राज्य सरकार ने भी इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए जांच में पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है। आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

यह मामला सरकारी विभागों में वित्तीय अनुशासन और बैंकिंग सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े करता है। जिस तरह से फर्जी डेबिट ट्रांजैक्शन के जरिए सरकारी फंड को शेल कंपनियों में डायवर्ट किया गया, वह बैंकिंग सुरक्षा प्रणालियों में बड़ी खामियों की ओर इशारा करता है। फिलहाल, पूरे मामले पर कानूनी प्रक्रिया जारी है और अदालत में पेश किए जाने वाले सबूतों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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