ग्वालियर में साइबर अपराधियों का नया पैंतरा: बिना ओटीपी के बैंक खाते खाली, 9 दिन में चार बड़ी वारदातें
मोबाइल पर आया एक अनजान लिंक, बैकग्राउंड में डाउनलोड हुई एक खतरनाक एपीके (APK) फाइल और कुछ ही पलों में पूरी जिंदगी की कमाई साफ। ग्वालियर शहर के अलग-अलग थाना क्षेत्रों से साइबर ठगी के चार ऐसे चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं, जिन्होंने पुलिस और जनता दोनों के होश उड़ा दिए हैं।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

ग्वालियर में साइबर ठगों ने धोखाधड़ी का एक नया और खतरनाक तरीका अपना लिया है। शहर के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में पिछले नौ दिनों के भीतर चार ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें पीड़ितों के बैंक खातों से बिना किसी ओटीपी (OTP) के हजारों रुपए गायब कर दिए गए। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि ठगों ने संभवतः मैलवेयर युक्त एपीके (APK) फाइल के जरिए पीड़ितों के मोबाइल का रिमोट एक्सेस हासिल कर लिया था।
चार्जिंग पर लगा मोबाइल और खाते से गायब हुए 37 हजार
थाटीपुर थाना क्षेत्र के नया मोहल्ला निवासी गौरव शाक्य के साथ हुई घटना ने सबको हैरान कर दिया। गौरव ने अपना फोन घर पर चार्जिंग पर लगाया था और बाजार चले गए थे। जब वे वापस लौटे तो पता चला कि उनके खाते से 37,400 रुपए किसी अज्ञात खाते में ट्रांसफर हो चुके हैं। ठगों ने न केवल उनके पैसे निकाले, बल्कि उनके खाते का उपयोग किसी अन्य संदिग्ध लेनदेन के लिए भी किया। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर साइबर सेल की मदद से जांच शुरू कर दी है।
इसी तरह, इंदरगंज थाना क्षेत्र के उस्मानी मस्जिद के पास रहने वाले आकाश प्रजापति को भी इसी तरह की ठगी का सामना करना पड़ा। आकाश को बिना किसी लिंक पर क्लिक किए या ओटीपी साझा किए 41 हजार रुपए कटने का मैसेज मिला। पुलिस को संदेह है कि उनके फोन में अनजाने में कोई हानिकारक फाइल डाउनलोड हो गई थी, जिसने उनके डिवाइस का नियंत्रण ठगों को सौंप दिया।
सोशल मीडिया पर ट्रेडिंग का झांसा और खाते की सफाई
महाराजपुरा थाना क्षेत्र में रहने वाली झलक जोहरी इंस्टाग्राम पर ट्रेडिंग के एक विज्ञापन के जाल में फंस गईं। 'मीनाक्षी सिंह' नाम की एक आईडी से उन्हें पैसे दोगुने करने का लालच दिया गया। विश्वास में आकर झलक ने ठगों द्वारा भेजे गए क्यूआर कोड के जरिए 60,986 रुपए ट्रांसफर कर दिए। पैसे मिलते ही ठगों ने अपना अकाउंट डी-एक्टिवेट कर लिया और संपर्क तोड़ दिया।
जनकगंज थाना क्षेत्र के कारोबारी शाहिद रजा के साथ हुई ठगी का मामला और भी गंभीर है। जब वे किसी को भुगतान करने की कोशिश कर रहे थे, तो ट्रांजेक्शन फेल हो गया। बैंक स्टेटमेंट चेक करने पर पता चला कि उनके खाते से 1.89 लाख रुपए निकाल लिए गए हैं और केवल 51 रुपए शेष बचे हैं। यह राशि 5 और 6 जून के बीच चार अलग-अलग किश्तों में निकाली गई थी।
पुलिस की चेतावनी और जांच की स्थिति
इन घटनाओं के बाद पुलिस प्रशासन ने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और न ही किसी संदिग्ध एपीके फाइल को इंस्टॉल करें। साइबर अपराधी अब सीधे ओटीपी मांगने के बजाय तकनीक का सहारा लेकर मोबाइल का कंट्रोल अपने हाथ में ले रहे हैं।
वर्तमान में सभी चार मामलों में संबंधित थानों में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस की साइबर टीम अब उन खातों की पड़ताल कर रही है जिनमें पीड़ितों की राशि ट्रांसफर की गई है। पुलिस का मानना है कि इन वारदातों के पीछे एक संगठित गिरोह हो सकता है जो लोगों की डिजिटल सुरक्षा में सेंध लगा रहा है।
आने वाले समय में पुलिस जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी कर रही है ताकि लोग ऑनलाइन लेनदेन में अधिक सावधानी बरतें। फिलहाल, सभी मामलों में साक्ष्यों को जुटाया जा रहा है और बैंक अधिकारियों से भी ट्रांजेक्शन ट्रेल के बारे में जानकारी मांगी गई है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!