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गोरखपुर: दुग्ध उत्पादक संगठन से संवर रहा 65 हजार महिलाओं और उनके बच्चों का भविष्य

65,000 women in UP gain income source through MPO. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन से बनी श्री बाबा गोरखनाथ कृपा मिल्क प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (MPO) से जुड़ी 65 हजार ग्रामीण महिलाओं को बहुआयामी लाभ मिल रहा। डेयरी सेक्टर के इस उद्यम की सदस्य बनकर इन महिलाओं ने न केवल खुद आत्मनिर्भरता की मंजिल चुनी है बल्कि अब उनके पाल्यों का भविष्य संवारने के लिए भी MPO से मार्गदर्शन मिल रहा है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

5 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 502
गोरखपुर: दुग्ध उत्पादक संगठन से संवर रहा 65 हजार महिलाओं और उनके बच्चों का भविष्य
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ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक स्वावलंबन का जरिया बना एमपीओ

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और आसपास के जिलों में 'श्री बाबा गोरखनाथ कृपा मिल्क प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन' (MPO) ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन से प्रेरित इस पहल ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के करीब एक हजार गांवों की 65 हजार से अधिक महिलाओं को डेयरी सेक्टर से जोड़कर उन्हें एक स्थिर आय का साधन उपलब्ध कराया है। नवंबर 2023 से सक्रिय यह संगठन न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत कर रहा है, बल्कि उनके परिवारों के समग्र विकास के लिए भी काम कर रहा है।

इस संगठन से जुड़ी महिलाएं गोरखपुर, देवरिया, महराजगंज, कुशीनगर, संतकबीरनगर, आजमगढ़ और मऊ जैसे जिलों से आती हैं। ये महिलाएं अपने दैनिक घरेलू कार्यों के साथ-साथ दुग्ध उत्पादन और संग्रहण के काम में सक्रिय हैं। संगठन की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसका टर्नओवर अब 200 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है। महिलाओं को उनके दूध का उचित मूल्य सीधे उनके बैंक खातों में मिलता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है।

बच्चों के करियर को नई दिशा देने की पहल

आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ अब यह संगठन सदस्य महिलाओं के बच्चों के भविष्य को संवारने पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है। हाल ही में, कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए दो दिवसीय करियर मार्गदर्शन कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों की वैज्ञानिक अभिरुचि और योग्यता का आकलन कर उन्हें भविष्य के सही करियर पथ का चुनाव करने में मदद करना था। विशेषज्ञों ने छात्रों को तकनीकी, व्यावसायिक और शैक्षणिक क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

इस पायलट प्रोजेक्ट में करीब सौ बच्चों ने अपने अभिभावकों के साथ भाग लिया। विशेषज्ञों ने मनोवैज्ञानिक परीक्षणों और संवाद के जरिए विद्यार्थियों की क्षमताओं को परखा और उन्हें कौशल विकास के लिए प्रेरित किया। संगठन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) धनराज साहनी का कहना है कि महिलाओं का वास्तविक सशक्तिकरण तभी संभव है जब उनके बच्चों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने के समान अवसर मिलें। इसी उद्देश्य से पहले गोबर गैस प्लांट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं और अब शिक्षा एवं करियर पर जोर दिया जा रहा है।

आर्थिक बदलाव की एक नई कहानी

इस पहल के परिणाम काफी उत्साहजनक रहे हैं। संगठन से जुड़ी महिलाओं को हर महीने की 3, 13 और 23 तारीख को भुगतान किया जाता है। आंकड़ों के अनुसार, एक सदस्य महिला औसतन आठ हजार रुपये प्रतिमाह कमा रही है। इसके अलावा, चार हजार से अधिक महिलाएं 'लखपति दीदी' बनने का गौरव हासिल कर चुकी हैं। यह बदलाव केवल आय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर में आए बड़े सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक है।

नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के सहयोग से संचालित यह संगठन उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत काम कर रहा है। भविष्य में संगठन का लक्ष्य न केवल दुग्ध उत्पादन की क्षमता को बढ़ाना है, बल्कि महिलाओं के परिवारों के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल विकास से जुड़ी अन्य कल्याणकारी योजनाओं को भी और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करना है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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