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गोरखपुर: धर्मशाला बाजार के 300 मकान मालिकों को बड़ी राहत, जमीन विवाद पर एसडीएम ने दिए यथास्थिति के निर्देश

मामले की गहनता से जांच होने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा। धर्मशाला बाजार की 5.242 हेक्टेयर जमीन से यह विवाद जुड़ा है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

4 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें 268
गोरखपुर: धर्मशाला बाजार के 300 मकान मालिकों को बड़ी राहत, जमीन विवाद पर एसडीएम ने दिए यथास्थिति के निर्देश
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गोरखपुर के धर्मशाला बाजार इलाके में पिछले काफी समय से जमीन के मालिकाना हक को लेकर चल रहे विवाद में स्थानीय निवासियों को बड़ी राहत मिली है। करीब 300 मकान मालिकों की चिंता उस समय बढ़ गई थी जब उन्हें पता चला कि उनकी आवासीय भूमि का वरासत किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर दर्ज कर दिया गया है। इस मामले में बढ़ते तनाव और स्थानीय लोगों के विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने हस्तक्षेप किया है।

राजस्व कोर्ट में लंबित है मामला

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम सदर ज्ञान प्रताप सिंह ने दोनों पक्षों को तहसील बुलाया था। विवादित भूमि का कुल क्षेत्रफल 5.242 हेक्टेयर बताया जा रहा है। एसडीएम ने स्पष्ट किया है कि यह पूरा मामला फिलहाल राजस्व कोर्ट के अधीन है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद प्रशासन ने आदेश दिया है कि जब तक कोर्ट से कोई अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक सभी पक्षों को यथास्थिति बनाए रखनी होगी। इसका अर्थ यह है कि जमीन पर किसी भी प्रकार का निर्माण या स्वामित्व परिवर्तन नहीं किया जा सकेगा।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि नायब तहसीलदार के स्तर से पारित किया गया वरासत आदेश नियमों के विरुद्ध था। निवासियों का कहना है कि वे दशकों से इस जमीन पर मकान बनाकर रह रहे हैं और उनके पास वैध दस्तावेज मौजूद हैं। अचानक हुए इस बदलाव ने सैकड़ों परिवारों के भविष्य पर संकट खड़ा कर दिया था, जिसके चलते रविवार को क्षेत्र के लोगों ने सड़कों पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराया था।

अधिकारियों का पक्ष और जांच की प्रक्रिया

इस विवाद के केंद्र में तत्कालीन नायब तहसीलदार नीरू सिंह द्वारा दिया गया आदेश है। हालांकि, उनका स्थानांतरण अब दूसरी तहसील में हो चुका है। अपने बचाव में उन्होंने स्पष्ट किया है कि वरासत का आदेश उपलब्ध पत्रावली और संबंधित लेखपाल की रिपोर्ट के आधार पर ही दिया गया था। उनके अनुसार, उस समय पत्रावली में भूमि को विवादित श्रेणी में नहीं दिखाया गया था, जिसके कारण प्रक्रिया का पालन करते हुए निर्णय लिया गया।

एसडीएम सदर ज्ञान प्रताप सिंह ने आश्वासन दिया है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि राजस्व अभिलेखों और साक्ष्यों की गहन समीक्षा के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा। प्रशासन ने दोनों पक्षों से अपील की है कि वे कानून व्यवस्था बनाए रखें और कोर्ट की प्रक्रिया का सम्मान करें। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, किसी भी पक्ष को जमीन की स्थिति में बदलाव करने की अनुमति नहीं होगी।

प्रभावित परिवारों के लिए आगे की राह

धर्मशाला बाजार के निवासियों के लिए यह एक बड़ी राहत है, क्योंकि प्रशासन के हस्तक्षेप से फिलहाल बेदखली या स्वामित्व के हस्तांतरण पर रोक लग गई है। प्रभावित लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल लगातार प्रशासन के संपर्क में है ताकि वे अपना पक्ष मजबूती से रख सकें। प्रशासन ने भी स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी प्रकार की जल्दबाजी में कोई कार्रवाई नहीं होगी और पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।

आने वाले दिनों में राजस्व विभाग के अधिकारी इस पूरे मामले से जुड़े दस्तावेजों की फिर से जांच करेंगे। इसमें लेखपाल की रिपोर्ट से लेकर वरासत की प्रक्रिया तक हर बिंदु को परखा जाएगा। स्थानीय लोग अब इस उम्मीद में हैं कि जांच के दौरान उनके पुराने मालिकाना हक और दस्तावेजों को मान्यता दी जाएगी, जिससे उनके सिर से छिनने का खतरा पूरी तरह टल सके।

फिलहाल, धर्मशाला बाजार में स्थिति सामान्य बनी हुई है और लोग प्रशासन के अगले आदेश का इंतजार कर रहे हैं। एसडीएम सदर ने स्पष्ट कर दिया है कि कोर्ट का निर्णय ही सर्वोपरि होगा और उसी के आधार पर भविष्य की कार्रवाई तय की जाएगी।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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