गाजियाबाद: 100 करोड़ की ठगी मामले में नंदग्राम थाना प्रभारी पर गिरी गाज, एसआईटी का पुनर्गठन
Ghaziabad builder fraud case update. Nandgram police station in-charge removed, SIT reconstituted. गाजियाबाद के नंदग्राम थाना क्षेत्र में एक बिल्डर द्वारा कथित तौर पर 100 करोड़ रुपये की ठगी कर फरार होने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में नंदग्राम के थाना प्रभारी (कोतवाल) पर कार्रवाई की गई है और विशेष जांच दल (एसआईटी) का पुनर्गठन किया गया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

बिल्डर के खिलाफ सख्त रुख, थाना प्रभारी पर कार्रवाई
गाजियाबाद के नंदग्राम थाना क्षेत्र में सामने आए 100 करोड़ रुपये के बड़े धोखाधड़ी मामले में पुलिस प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। एक बिल्डर द्वारा फ्लैट खरीदारों के साथ की गई करोड़ों की ठगी और उसके फरार होने के बाद से ही स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश था। इस मामले में पुलिस की कार्यशैली पर उठ रहे सवालों के बीच अब उच्च अधिकारियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नंदग्राम के थाना प्रभारी (कोतवाल) को हटा दिया है।
इस घटनाक्रम से पहले, नंदग्राम थाने में तैनात एक अन्य पुलिसकर्मी को भी लाइन हाजिर किया गया था। देर रात डीसीपी स्तर से थाना प्रभारी के खिलाफ लिए गए इस निर्णय ने पुलिस महकमे में हलचल पैदा कर दी है। प्रशासन का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी और पीड़ितों को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ेगी।
एसआईटी का पुनर्गठन और जांच में तेजी
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) का पुनर्गठन किया है। पुरानी टीम की कार्यप्रणाली और जांच की गति पर उठे सवालों के बाद, एसआईटी में फेरबदल करते हुए नए अधिकारियों को शामिल किया गया है। नई टीम को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की बारीकी से जांच करें।
जांच टीम अब इस मामले को नए सिरे से खंगाल रही है। ठगी के शिकार हुए दर्जनों खरीदारों को पुलिस ने दोबारा बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया है। पुलिस टीम भुगतान के सभी रिकॉर्ड, प्रॉपर्टी के दस्तावेज और बैंक ट्रांजेक्शन की गहन पड़ताल कर रही है ताकि ठगी की कुल राशि और इसमें शामिल सभी आरोपियों की भूमिका को स्पष्ट किया जा सके।
क्या है पूरा मामला और खरीदारों का दर्द
आरोप है कि बिल्डर ने आवासीय प्रोजेक्ट के नाम पर सैकड़ों लोगों से मोटी रकम वसूली थी। खरीदारों को फ्लैट का कब्जा देने का वादा किया गया था, लेकिन समय बीतने के बाद भी न तो प्रोजेक्ट पूरा हुआ और न ही खरीदारों को उनका घर मिला। अंततः बिल्डर फरार हो गया, जिससे खरीदारों की जमा-पूंजी फंस गई। अब पीड़ित न्याय के लिए पुलिस और प्रशासन के चक्कर काट रहे हैं।
पुलिस के अनुसार, बिल्डर ने सुनियोजित तरीके से लोगों को लुभावने वादे देकर फंसाया था। अब तक की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस का कहना है कि जांच में जो भी व्यक्ति या अधिकारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फरार बिल्डर की तलाश के लिए भी टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
आगे की राह और कानूनी प्रक्रिया
फिलहाल, पुलिस प्रशासन का पूरा ध्यान साक्ष्य जुटाने और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी पर है। एसआईटी को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि किसी भी निर्दोष को परेशानी न हो, लेकिन दोषियों को बख्शा न जाए। आने वाले दिनों में पुलिस इस मामले में कुछ और गिरफ्तारियां भी कर सकती है, क्योंकि जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
स्थानीय निवासियों और पीड़ित खरीदारों की नजरें अब नई एसआईटी की रिपोर्ट पर टिकी हैं। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि जांच को किसी भी दबाव में नहीं आने दिया जाएगा और पीड़ित खरीदारों को उनका हक दिलाने के लिए हर संभव कानूनी कदम उठाए जाएंगे। इस मामले ने गाजियाबाद के रियल एस्टेट क्षेत्र में सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
