त्योहारी सीजन से पहले रसोई का बजट बिगड़ा: दाल-तेल समेत 99% खाद्य वस्तुओं के दाम में उछाल
Rising food prices inflation India festival season ration cost hike update. उपभोक्ता मामले विभाग के प्राइस मॉनिटरिंग सिस्टम के मुताबिक इन 5 महीनों में 16 मुख्य खाद्य वस्तुओं में से 15 के दाम बढ़े हैं। इनमें भी सबसे ज्यादा तेजी दालों और तेल में रही।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

पांच महीने में महंगाई की मार
देश में आम आदमी की रसोई का बजट पिछले पांच महीनों में बुरी तरह प्रभावित हुआ है। उपभोक्ता मामले विभाग के प्राइस मॉनिटरिंग सिस्टम के आंकड़ों पर गौर करें तो 28 फरवरी से 3 अगस्त के बीच देश में 16 प्रमुख खाद्य वस्तुओं में से 15 के दाम में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह स्थिति तब है जब आने वाले समय में त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है, जिससे आम जनता की चिंताएं और बढ़ गई हैं।
आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में दालों और खाद्य तेलों की कीमतों में सबसे ज्यादा तेजी देखी गई है। अरहर दाल में लगभग 6 रुपये प्रति किलो, उड़द दाल में 5.71 रुपये और चना दाल में 4.65 रुपये की वृद्धि हुई है। इसके अलावा, सरसों के तेल की कीमतों में भी 7.56 रुपये प्रति लीटर का इजाफा हुआ है। दूध और चीनी जैसी रोजमर्रा की चीजों के दाम भी क्रमशः 3 रुपये और 2.25 रुपये तक बढ़ गए हैं।
महंगाई के पीछे के प्रमुख कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में इस उछाल के पीछे कई वैश्विक और स्थानीय कारण जिम्मेदार हैं। कमजोर और असमान मानसून ने खरीफ फसलों, विशेषकर दालों के रकबे को प्रभावित किया है। जुलाई के अंत तक दालों की बुवाई पिछले साल की तुलना में 7% कम रही है, जिससे भविष्य में उत्पादन घटने की आशंका ने बाजार में कीमतों को ऊपर धकेल दिया है।
वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, विशेषकर पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने आयात लागत को बढ़ा दिया है। भारत अपनी खाद्य तेल की जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम और सोया तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है। इसके साथ ही चीनी के मामले में एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने की बढ़ती मांग और उत्पादन में कमी ने भी कीमतों को सहारा दिया है।
त्योहारी सीजन पर दबाव की आशंका
अगस्त के महीने से देश में रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेशोत्सव, नवरात्र और दीपावली जैसे बड़े त्योहारों का दौर शुरू हो रहा है। त्योहारों के दौरान मांग में होने वाली स्वाभाविक वृद्धि कीमतों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में आयात लागत कम नहीं होती है, तो आने वाले महीनों में भी दाल और तेल की कीमतों में नरमी की उम्मीद कम ही नजर आती है।
हालांकि, गेहूं और आटे की स्थिति फिलहाल थोड़ी स्थिर बनी हुई है। सरकारी गोदामों में गेहूं का पर्याप्त भंडार होने और बाजार में बेहतर उपलब्धता के कारण आटे की कीमतों में केवल मामूली 0.22 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। चावल के दाम भी 1.57 रुपये प्रति किलो बढ़े हैं, जो अन्य खाद्य वस्तुओं की तुलना में कम हैं।
आगे की राह
आर्थिक जानकारों का कहना है कि जब तक मानसून की स्थिति में सुधार नहीं होता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला सामान्य नहीं होती, तब तक खाद्य मुद्रास्फीति का दबाव बना रहेगा। सरकार के लिए चुनौती यह है कि वह त्योहारों के दौरान आपूर्ति को सुचारू बनाए रखे ताकि आम उपभोक्ताओं को राहत मिल सके। फिलहाल, बाजार की अनिश्चितता और बढ़ती आयात लागत ने आम आदमी की थाली को महंगा बना दिया है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
