धार: ओवरलोड बस पर आरटीओ की अनोखी कार्रवाई, चालान के बजाय यात्रियों को किराया लौटाने का निर्देश
धार में रक्षाबंधन पर बस चेकिंग के दौरान अलग मामला सामने आया। इंदौर-अहमदाबाद नेशनल हाईवे पर घाटा बिल्लोद में आरटीओ बसों की जांच कर रहे थे।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

रक्षाबंधन के मौके पर आरटीओ की अनूठी पहल
मध्य प्रदेश के धार जिले में रक्षाबंधन के त्योहार के दौरान परिवहन विभाग की एक अलग ही कार्यशैली देखने को मिली। इंदौर-अहमदाबाद नेशनल हाईवे पर स्थित घाटा बिल्लोद के पास आरटीओ की टीम बसों की नियमित जांच कर रही थी। इसी दौरान अधिकारियों ने एक ऐसी बस को रोका जो क्षमता से अधिक यात्रियों के साथ चल रही थी। यह बस सांवेर से धार की ओर जा रही थी और इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं सवार थीं।
बस में क्षमता से अधिक भीड़ होने के कारण सुरक्षा मानकों का उल्लंघन हो रहा था। आरटीओ हृदयेश यादव ने जब बस को रुकवाकर जांच की, तो पाया कि बस में जगह की कमी के बावजूद यात्रियों को ठूंस-ठूंस कर भरा गया है। आमतौर पर ऐसी स्थिति में विभाग भारी जुर्माने या चालान की कार्रवाई करता है, लेकिन इस बार अधिकारियों ने एक मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए मौके पर ही समाधान निकालने का निर्णय लिया।
जुर्माने के बदले यात्रियों को राहत
जब आरटीओ अधिकारियों ने बस कंडक्टर से ओवरलोडिंग को लेकर सवाल किया, तो कंडक्टर ने रक्षाबंधन के त्योहार का हवाला देते हुए मजबूरी जताई। उसने बताया कि त्योहार के कारण यात्रियों की संख्या अचानक बढ़ गई है और महिलाएं अपने मायके या भाइयों के घर जाने के लिए यात्रा कर रही हैं। स्थिति को समझते हुए आरटीओ हृदयेश यादव ने बस संचालक को एक शर्त रखी।
अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यदि बस संचालक सांवेर से धार तक यात्रा कर रही सभी महिलाओं का आधा किराया वापस कर दे, तो विभाग की ओर से कोई चालान नहीं काटा जाएगा और न ही कोई जुर्माना वसूला जाएगा। यह प्रस्ताव यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में सामने आया, क्योंकि वे पहले ही भीड़ और असुविधा का सामना कर रहे थे।
अधिकारी के निर्देश का पालन करते हुए बस कंडक्टर ने तुरंत बस में सवार महिलाओं के पास जाकर उन्हें किराए की राशि वापस करना शुरू किया। प्रत्येक महिला यात्री को 50-50 रुपये वापस लौटाए गए। इस अप्रत्याशित फैसले से बस में सवार महिलाएं काफी खुश नजर आईं। उन्होंने आरटीओ की इस पहल की सराहना की और अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।
सुरक्षा और संवेदनशीलता का संतुलन
यह घटना सड़क सुरक्षा नियमों के पालन और त्योहार के समय यात्रियों की संवेदनशीलता के बीच एक संतुलन का उदाहरण बनी। जहां एक ओर आरटीओ ने नियमों का उल्लंघन करने पर बस को रोका, वहीं दूसरी ओर आम जनता पर आर्थिक बोझ डालने के बजाय उन्हें सीधे लाभ पहुंचाने का रास्ता चुना। इस कार्रवाई ने यह भी सुनिश्चित किया कि बस संचालक भविष्य में ओवरलोडिंग से बचें।
क्षेत्र के अन्य बस संचालकों के लिए भी यह एक संदेश है कि परिवहन विभाग सुरक्षा मानकों के प्रति गंभीर है। हालांकि, इस विशेष मामले में त्योहार की महत्ता को देखते हुए अधिकारियों ने नरमी बरती। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से न केवल प्रशासन की छवि बेहतर होती है, बल्कि आम नागरिकों का सिस्टम पर भरोसा भी बढ़ता है।
फिलहाल, इस घटना के बाद से क्षेत्र में आरटीओ की इस अनूठी कार्यशैली की चर्चा हो रही है। यात्रियों ने उम्मीद जताई है कि भविष्य में भी विभाग इसी तरह की व्यावहारिक सोच के साथ काम करेगा, जिससे नियमों का पालन भी हो और आम लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!