छिंदवाड़ा में मानसून की सुस्त चाल: पिछले साल के मुकाबले 101 मिमी कम हुई बारिश
Chhindwara monsoon update: 270.5mm rain recorded from June 1 to July 8, 2026. जिले में मानसून की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही है। 1 जून से 8 जुलाई 2026 तक जिले में औसतन 270.5 मिमी बारिश दर्ज की गई है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

मानसून की धीमी शुरुआत से चिंता
छिंदवाड़ा जिले में इस वर्ष मानसून का आगमन उम्मीद के अनुरूप नहीं रहा है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 8 जुलाई 2026 तक जिले में कुल 270.5 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है। पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान जिले में 371.5 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। इस प्रकार, इस साल अब तक लगभग 101 मिमी कम बारिश हुई है, जो कृषि और जल स्रोतों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
जिले की सामान्य औसत वार्षिक वर्षा का आंकड़ा 1059 मिमी है। वर्तमान में हुई 270.5 मिमी बारिश सामान्य औसत का केवल 25 प्रतिशत ही है। मानसून की इस सुस्त चाल के कारण जिले के कई हिस्सों में अभी भी पर्याप्त नमी का अभाव बना हुआ है, हालांकि हालिया बारिश से किसानों को थोड़ी राहत जरूर मिली है।
चांद तहसील में सबसे अधिक, जिला मुख्यालय में सबसे कम वर्षा
जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बारिश का वितरण काफी असमान रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो चांद तहसील इस सीजन में सबसे अधिक बारिश दर्ज करने वाला क्षेत्र बना हुआ है, जहां अब तक 417.7 मिमी वर्षा हुई है। इसके बाद चौरई में 355.2 मिमी और अमरवाड़ा में 272 मिमी बारिश दर्ज की गई है। वहीं, मोहखेड़, उमरेठ और बिछुआ में भी मध्यम स्तर की बारिश दर्ज की गई है।
इसके विपरीत, जिला मुख्यालय छिंदवाड़ा में बारिश का आंकड़ा काफी कम है। यहां अब तक मात्र 184.6 मिमी बारिश ही दर्ज की गई है, जो जिले के अन्य क्षेत्रों की तुलना में सबसे कम है। यह असमान वितरण स्थानीय जल प्रबंधन और खेती के लिए एक चुनौती पेश कर रहा है।
हालिया बारिश से मिली आंशिक राहत
बुधवार को जिले में औसतन 16.7 मिमी बारिश दर्ज की गई, जिसने सूखे जैसे हालात से जूझ रहे किसानों को थोड़ी राहत दी है। अमरवाड़ा क्षेत्र में बुधवार को सबसे अधिक 44.2 मिमी बारिश हुई, जबकि हर्रई में 32.2 मिमी और उमरेठ में 26.6 मिमी बारिश दर्ज की गई। परासिया में भी 19.1 मिमी वर्षा हुई है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में जिले में बारिश की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। यदि आने वाले समय में मानसून सक्रिय रहता है, तो खरीफ की फसलों को पर्याप्त पानी मिल सकेगा और जलाशयों में जल स्तर में सुधार की उम्मीद है। भूजल स्तर को रिचार्ज करने के लिए भी आगामी हफ्तों में अच्छी बारिश की आवश्यकता है।
खेती पर प्रभाव और भविष्य की उम्मीदें
मानसून की कमी का सीधा असर खरीफ फसलों की बुवाई और उनकी शुरुआती वृद्धि पर पड़ता है। हालांकि, वर्तमान में हुई बारिश से किसानों को अपनी फसलों को बचाने में मदद मिली है। कृषि विभाग भी किसानों को मौसम के अनुसार बुवाई की सलाह दे रहा है ताकि कम बारिश के बावजूद उत्पादन पर अधिक प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
प्रशासन और स्थानीय निवासी अब मानसून के अगले दौर की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यदि बारिश का सिलसिला इसी तरह बना रहा, तो जिले में जल संकट की स्थिति से बचा जा सकेगा। फिलहाल, मौसम विभाग की ओर से जारी पूर्वानुमानों पर सभी की नजरें टिकी हैं ताकि कृषि कार्यों को सुचारू रूप से आगे बढ़ाया जा सके।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
