बुधनी विकास परियोजना में बड़ी लापरवाही: MPUDC ने ठेकेदार को किया ब्लैकलिस्ट, 5.4 करोड़ की गारंटी जब्त
MPUDC terminates Budhni infrastructure project contract due to negligence and delays. मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी (MPUDC) ने बुधनी अधोसंरचना विकास परियोजना में काम में देरी और संविदा की शर्तों के उल्लंघन पर बड़ी कार्रवाई की है। कंपनी ने मेसर्स जेएससी आईए वोज़रोज़्देनिये इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स काश्यपी इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड (संयुक्त उपक्रम) का अनुबंध समाप्त कर दिया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

परियोजना में देरी और शर्तों के उल्लंघन पर सख्त एक्शन
मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी (MPUDC) ने सीहोर जिले के बुधनी में चल रही अधोसंरचना विकास परियोजना को लेकर एक बड़ा और सख्त निर्णय लिया है। परियोजना के क्रियान्वयन में लगातार हो रही देरी और संविदा की शर्तों का पालन न करने के कारण संबंधित निर्माण एजेंसी का अनुबंध तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है। इस कार्रवाई के तहत न केवल ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया गया है, बल्कि उनकी भारी-भरकम बैंक गारंटी भी राजसात करने का आदेश दिया गया है।
यह कार्रवाई MPUDC के प्रबंध संचालक संकेत भोंडवे के निर्देशों के बाद अमल में लाई गई है। जिन कंपनियों पर यह गाज गिरी है, उनमें मेसर्स जेएससी आईए वोज़रोज़्देनिये इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स काश्यपी इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड का संयुक्त उपक्रम शामिल है। इन कंपनियों को बुधनी में विभिन्न महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन तय समय सीमा के भीतर काम पूरा करने में वे पूरी तरह विफल रही हैं।
क्या था परियोजना का दायरा और क्यों हुई कार्रवाई?
बुधनी अधोसंरचना विकास परियोजना, जिसे MPUSIP-AF पैकेज-1G (A) के तहत संचालित किया जा रहा था, में कई महत्वपूर्ण कार्य शामिल थे। इसमें टॉय विलेज, रेंटल हाउसिंग, कन्वेंशन सेंटर, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और हाट बाजार जैसे निर्माण कार्य किए जाने थे। इन कार्यों का उद्देश्य क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करना था, लेकिन निर्माण कार्य की धीमी गति ने पूरी परियोजना को अधर में लटका दिया था।
MPUDC के अधिकारियों के अनुसार, संविदाकार को काम में तेजी लाने के लिए कई बार नोटिस जारी किए गए थे। इसके अतिरिक्त, विभाग द्वारा समय-समय पर समीक्षा बैठकें भी आयोजित की गईं, जिनमें ठेकेदार को पर्याप्त संसाधन जुटाने और समय पर डिजाइन व आरेख उपलब्ध कराने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। हालांकि, ठेकेदार की ओर से इन निर्देशों की लगातार अनदेखी की गई और कार्य की प्रगति संतोषजनक नहीं पाई गई।
विभाग ने ठेकेदार द्वारा दिए गए स्पष्टीकरणों को भी सिरे से खारिज कर दिया है। जांच में यह पाया गया कि संविदा की शर्तों का गंभीर उल्लंघन हुआ है, जिसके बाद प्रबंधन ने अनुबंध समाप्त करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही, लगभग 5 करोड़ 40 लाख रुपये की बैंक गारंटी को राजसात करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
भविष्य के लिए कड़ा संदेश
इस मामले पर टिप्पणी करते हुए प्रबंध संचालक संकेत भोंडवे ने स्पष्ट किया है कि राज्य की अधोसंरचना परियोजनाओं में गुणवत्ता, समयबद्धता और वित्तीय अनुशासन के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो भी एजेंसी अनुबंध की शर्तों को दरकिनार करेगी, उसके खिलाफ इसी तरह की सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
ठेकेदार को एक साल के लिए ब्लैकलिस्ट किए जाने के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि संबंधित कंपनियां भविष्य में MPUDC की किसी भी निविदा प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकेंगी। इस कार्रवाई से निर्माण क्षेत्र में काम करने वाली अन्य एजेंसियों के बीच एक कड़ा संदेश गया है कि सरकारी कार्यों में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अब प्रशासन के सामने चुनौती इस अधूरी परियोजना को दोबारा शुरू करने और इसे समय पर पूरा करने की है। स्थानीय स्तर पर इस कार्रवाई का स्वागत किया जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से निर्माण कार्यों में हो रही देरी से आम जनता को असुविधा का सामना करना पड़ रहा था। उम्मीद है कि जल्द ही नई निविदा प्रक्रिया के माध्यम से इन कार्यों को गति दी जाएगी।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
