बिहार: सरकारी योजनाओं के लिए महिला ने बदली उम्र, कागजों में 17 साल 'जवान' होकर उठाया दोहरा लाभ

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

बिहार के औरंगाबाद जिले के हसपुरा प्रखंड से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए उम्र के साथ खिलवाड़ किया गया। टाल पंचायत की निवासी रेणु देवी ने एक ही समय में दो अलग-अलग उम्र दिखाकर वृद्धावस्था पेंशन और प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ प्राप्त किया है। इस फर्जीवाड़े ने प्रशासनिक व्यवस्था और दस्तावेजों की सत्यता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तीन साल में 17 साल का अंतर
दस्तावेजों के विश्लेषण से पता चला है कि वर्ष 2022 में सरकारी रिकॉर्ड में रेणु देवी को 60 वर्ष से अधिक आयु का बुजुर्ग दिखाया गया था, जिसके आधार पर उन्हें वृद्धावस्था पेंशन का लाभ मिलना शुरू हुआ। मई 2023 में उनके खाते में पेंशन की राशि भी भेजी गई। हालांकि, जब 2025 में प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन किया गया, तो उन्हीं दस्तावेजों में उनकी उम्र घटकर 43 वर्ष दर्ज कर दी गई। मनरेगा जॉब कार्ड के अनुसार उनकी जन्मतिथि 1 जनवरी 1982 है, जिससे स्पष्ट होता है कि महज तीन वर्षों के अंतराल में कागजों पर उनकी उम्र 17 साल कम कर दी गई।
इस हेरफेर के जरिए महिला ने एक साथ दो विपरीत सरकारी योजनाओं का लाभ लिया। जहां एक ओर पेंशन पाने के लिए उन्हें 60 वर्ष से अधिक का होना अनिवार्य था, वहीं आवास योजना के लिए उन्हें युवा श्रेणी में दिखाया गया। इसके अलावा, मनरेगा के तहत शौचालय निर्माण के लिए भी उन्होंने 12 हजार रुपये की राशि प्राप्त की है।
पति ने भी बदला नाम और पहचान
फर्जीवाड़े का यह सिलसिला केवल महिला तक सीमित नहीं है। उनके पति दिनेश कुमार पर भी दोहरी पहचान का उपयोग करने का आरोप है। दिनेश कुमार टाल पंचायत में 'राकेश रौशन' के नाम से स्वच्छता सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने एसबीएमजी प्रशिक्षण दिनेश के नाम से लिया, लेकिन विभाग को प्रमाण पत्र राकेश रौशन के नाम से सौंपा। वह मानदेय भी इसी फर्जी नाम से उठा रहे हैं। प्रखंड को-ऑर्डिनेटर दिवेन्द्र कुमार नयन के अनुसार, दिनेश ने शपथ पत्र देकर स्वीकार किया है कि दोनों नाम उसी के हैं।
यह मामला आधार कार्ड से छेड़छाड़ और विभागीय मिलीभगत की ओर इशारा करता है। एक ही वित्तीय वर्ष में दो अलग-अलग उम्र दिखाकर लाभ लेना यह साबित करता है कि सत्यापन प्रक्रिया में बड़ी खामियां मौजूद हैं। स्थानीय स्तर पर इस बात की चर्चा है कि बिना किसी अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत के इतने बड़े स्तर पर दस्तावेजों में बदलाव संभव नहीं था।
प्रशासन की कड़ी कार्रवाई का आश्वासन
मामले के संज्ञान में आने के बाद हसपुरा के बीडीओ पंकज कुमार ने इसे बेहद गंभीर बताया है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं कार्यालय जाकर सभी संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच करेंगे। बीडीओ ने स्पष्ट किया है कि यदि उम्र घटाने और सरकारी योजनाओं में धोखाधड़ी करने की बात सही पाई जाती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल, स्थानीय प्रशासन इस पूरे प्रकरण की फाइलें खंगाल रहा है। यह घटना इस बात का संकेत है कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता की कितनी आवश्यकता है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन से लोग शामिल हैं और अब तक सरकारी खजाने को कितना नुकसान पहुंचाया गया है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
