भोजपुर में सोशल मीडिया पर भड़काऊ कंटेंट डालने वाले 30 लोगों पर एफआईआर, पुलिस की बड़ी कार्रवाई
भोजपुर पुलिस ने सोशल मीडिया पर भ्रामक और आपत्तिजनक कंटेंट साझा करने वाले 30 यूजर आईडी धारकों और कंटेंट क्रिएटर्स के खिलाफ मामला दर्ज किया है। एआई का उपयोग कर फर्जी वीडियो फैलाने के आरोप में यह कार्रवाई की गई है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

सोशल मीडिया पर भड़काऊ कंटेंट पर पुलिस की सख्ती
भोजपुर जिले में साइबर पुलिस ने सोशल मीडिया का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ एक बड़ा अभियान छेड़ दिया है। हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आपत्तिजनक, भ्रामक और भड़काऊ कंटेंट प्रसारित करने के आरोप में 30 यूजर आईडी धारकों और कंटेंट क्रिएटर्स के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस का मानना है कि इन पोस्ट के जरिए समाज में असंतोष फैलाने और कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही थी।
पुलिस की साइबर सेल ने फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स की गहन निगरानी की है। जांच के दौरान यह पाया गया कि कई अकाउंट्स से वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और राज्य के मुख्यमंत्री के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया था। इन पोस्ट का उद्देश्य सरकार और पुलिस प्रशासन के प्रति जनता में अविश्वास पैदा करना था, जिसे देखते हुए प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है।
एआई तकनीक का गलत इस्तेमाल और भ्रामक प्रचार
जांच में एक चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि इन भ्रामक पोस्ट को तैयार करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का सहारा लिया गया था। संदिग्धों ने एआई के जरिए फर्जी फोटो और वीडियो बनाए, जिन्हें बिहार या भोजपुर की घटनाओं से जोड़कर वायरल किया गया। वास्तव में, इनमें से कई वीडियो दूसरे राज्यों की पुरानी घटनाओं के थे, जिन्हें तोड़-मरोड़कर स्थानीय माहौल बिगाड़ने के लिए इस्तेमाल किया गया।
हालांकि पुलिस ने अपनी प्राथमिकी में किसी एक विशिष्ट घटना का नाम नहीं लिया है, लेकिन माना जा रहा है कि यह कार्रवाई भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर प्रकरण के बाद सोशल मीडिया पर मचे बवाल के बाद की गई है। उस घटना के बाद से ही सोशल मीडिया पर कई तरह के भ्रामक दावे किए जा रहे थे, जिससे जिले में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।
अकाउंट बंद कराने की प्रक्रिया शुरू
पुलिस ने उन सभी 30 संदिग्ध यूजर आईडी को चिह्नित कर लिया है जो इस प्रकार की गतिविधियों में संलिप्त पाए गए थे। अब इन अकाउंट्स को बंद कराने के लिए संबंधित सोशल मीडिया कंपनियों को औपचारिक अनुरोध भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि तकनीकी जांच के जरिए उन लोगों की पहचान की जा रही है जो इन अकाउंट्स को संचालित कर रहे थे। जल्द ही इन सभी के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया को और तेज किया जाएगा।
प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर आने वाली किसी भी खबर या वीडियो की सत्यता की जांच किए बिना उसे साझा न करें। भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ पुलिस लगातार निगरानी कर रही है और भविष्य में भी ऐसी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी। साइबर अपराध के प्रति पुलिस की यह कार्रवाई यह स्पष्ट करती है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कानून का उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
