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भरत तिवारी एनकाउंटर मामला: मानवाधिकार आयोग ने मुआवजा देने के दिए सख्त निर्देश

Bihar Human Rights Commission strict on Bharat Tiwari encounter case. आयोग ने मामले में राज्य सरकार को दो सप्ताह का अतिरिक्त समय तो दिया है, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया है कि इस अवधि में पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

9 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 896
भरत तिवारी एनकाउंटर मामला: मानवाधिकार आयोग ने मुआवजा देने के दिए सख्त निर्देश
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बिहार के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में राज्य मानवाधिकार आयोग ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। आयोग ने मृतक के आश्रितों को तत्काल प्रभाव से अनुग्रह राशि (मुआवजा) उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में मानवाधिकारों के उल्लंघन और पुलिस की भूमिका को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं, जिसके मद्देनजर आयोग ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है।

सरकार को मिला दो सप्ताह का अतिरिक्त समय

हाल ही में हुई सुनवाई के दौरान बिहार सरकार की ओर से अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (विधि एवं व्यवस्था) आयोग के समक्ष पेश हुए। सरकार ने मामले से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने और उसे प्रस्तुत करने के लिए आयोग से दो सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा था। आयोग ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया है कि रिपोर्ट आने तक पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता से वंचित नहीं रखा जा सकता।

आयोग ने अपने आदेश में कहा है कि रिपोर्ट दाखिल करने की प्रक्रिया अपनी जगह है, लेकिन पीड़ित परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्हें नियमानुसार मिलने वाली राहत राशि में देरी नहीं होनी चाहिए। यह निर्देश सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि अब उन्हें तय समय सीमा के भीतर मुआवजा सुनिश्चित करना होगा।

क्या है पूरा मामला और घटनाक्रम

यह पूरा मामला 16 जून की उस घटना से जुड़ा है, जिसमें पुलिस टीम भरत भूषण तिवारी को समझाने के लिए पहुंची थी। पुलिस के दावों के अनुसार, उस दौरान भरत भूषण ने पुलिसकर्मियों पर पिस्टल तान दी थी, जिसके बाद हुई कार्रवाई में उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद से ही पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं और निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मानवाधिकार वकील एस.के. झा ने आयोग में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता का तर्क है कि इस मामले में पुलिस की भूमिका संदिग्ध है और इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। वकील ने मांग की है कि यदि जांच में किसी भी पुलिसकर्मी की लापरवाही या गलत मंशा सामने आती है, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए।

अगली सुनवाई 3 अगस्त को

बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 3 अगस्त की तारीख तय की है। तब तक राज्य सरकार को अपनी विस्तृत रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि वह पूरे मामले की बारीकी से निगरानी कर रहा है और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।

आयोग की इस सख्ती से अब प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। जहां एक ओर सरकार को अपनी रिपोर्ट में पुलिस की कार्रवाई को सही ठहराने के लिए ठोस सबूत पेश करने होंगे, वहीं दूसरी ओर पीड़ित परिवार को समय पर मुआवजा न देने की स्थिति में आयोग की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है। यह मामला राज्य में पुलिस एनकाउंटर और मानवाधिकारों के संतुलन को लेकर एक बड़ी नजीर बन सकता है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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