बैतूल: 34 साल बाद गूंजी घर में किलकारी, प्रजापति परिवार ने अनोखे अंदाज में किया बेटी का स्वागत
बैतूल शहर में मंगलवार को ‘बेटी हुई है’ लिखी तीन-चार गाड़ियों का काफिला लोगों का ध्यान खींचता रहा। यह किसी प्रचार का हिस्सा नहीं था, बल्कि प्रजापति परिवार में करीब 34 साल बाद बेटी के जन्म की खुशी में निकाला गया काफिला था।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

तीन दशक के लंबे इंतजार के बाद घर में आई खुशियां
बैतूल शहर में इन दिनों एक परिवार की खुशियां चर्चा का विषय बनी हुई हैं। कंपनी गार्डन इलाके में रहने वाले प्रजापति परिवार में करीब 34 साल के लंबे अंतराल के बाद बेटी का जन्म हुआ है। इस खास मौके को यादगार बनाने के लिए परिवार ने न केवल आतिशबाजी की, बल्कि शहर की सड़कों पर गाड़ियों का एक काफिला भी निकाला, जिस पर बड़े अक्षरों में 'बेटी हुई है' लिखा हुआ था।
मूर्तिकार सुनील प्रजापति और उनकी पत्नी निधि के घर 29 अगस्त को नन्ही परी ने जन्म लिया। 1 सितंबर को जब परिवार अपनी बेटी को अस्पताल से घर लेकर लौटा, तो यह पल किसी उत्सव से कम नहीं था। गाड़ियों के काफिले को देखकर राहगीर भी रुककर इस खुशी में शामिल होते नजर आए।
मन्नतें हुईं पूरी, समाज को दिया सकारात्मक संदेश
सुनील प्रजापति, जो देवी की मूर्तियां बनाने का काम करते हैं, ने बताया कि उनके परिवार में बेटी का जन्म किसी मन्नत के पूरा होने जैसा है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से वे घर में बेटी की कमी महसूस कर रहे थे। इस आयोजन के जरिए वे समाज को यह संदेश देना चाहते हैं कि बेटी बोझ नहीं, बल्कि परिवार का सौभाग्य होती है।
परिवार की खुशी में शामिल होते हुए मां निधि प्रजापति ने कहा कि वे अपनी बेटी को उच्च शिक्षा और सम्मान के साथ आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगी। उन्होंने समाज से भी अपील की कि बेटियों को समान अवसर दिए जाएं ताकि वे अपने सपनों को पूरा कर सकें।
दादा के लिए देवी के दर्शन जैसा है यह पल
बेटी के दादा राजू किशन प्रजापति ने भावुक होते हुए बताया कि उनके तीन बेटों के परिवार में अब तक कोई बेटी नहीं थी। वे अक्सर दूसरों की बेटियों की पढ़ाई में मदद करके अपनी खुशी तलाशते थे। उन्होंने बताया कि जब उनके छोटे बेटे का जन्म हुआ था, तब भी उन्होंने अस्पताल में किसी और की बेटी को देखकर मजाक में उसे अपनाने की इच्छा जताई थी। आज दशकों बाद घर में बेटी का आगमन उनके लिए साक्षात देवी के दर्शन जैसा है।
दादा ने यह भी साझा किया कि बेटी के घर आने के तुरंत बाद उन्हें काम के नए अवसर मिले हैं, जिसे वे बेटी का शुभ कदम मान रहे हैं। उनका मानना है कि बेटा भाग्य से पैदा होता है, लेकिन बेटी का जन्म सौभाग्य लेकर आता है।
बदलाव की बयार
प्रजापति परिवार का यह जश्न इस बात का प्रमाण है कि समाज में बेटियों को लेकर सोच बदल रही है। जिस तरह से उन्होंने बेटी के जन्म को गर्व के साथ मनाया, वह अन्य परिवारों के लिए भी एक प्रेरणा है। घर में बेटी का गृहप्रवेश पूरे विधि-विधान और उत्साह के साथ किया गया, जिससे पूरा मोहल्ला गूंज उठा।
यह घटना न केवल एक परिवार की निजी खुशी है, बल्कि यह उन कुरीतियों पर भी प्रहार है जो बेटियों के जन्म को दुख का कारण मानती हैं। बैतूल के इस परिवार ने साबित कर दिया है कि बेटी का स्वागत पूरे सम्मान और धूमधाम के साथ किया जाना चाहिए।

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मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!