बांकीपुर उपचुनाव: नामांकन रद्द होने पर वीणा मानवी का बड़ा आरोप, कहा- भाजपा मेरी उम्मीदवारी से डरी हुई थी
Veena Manvi alleges political conspiracy behind Bankipur election nomination cancellation. बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में नामांकन रद्द होने के बाद उम्मीदवार वीणा मानवी ने पटना में पीसी कर प्रशासन और बीजेपी पर कई आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उन्हें सुनियोजित राजनीतिक साजिश के तहत चुनाव लड़ने से रोका गया।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव के दौरान नामांकन रद्द होने के बाद उम्मीदवार वीणा मानवी ने प्रशासन और सत्ताधारी दल पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए आरोप लगाया कि उन्हें एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश के तहत चुनावी दौड़ से बाहर किया गया है। मानवी का दावा है कि उनकी सक्रियता और जनसमर्थन से विपक्षी दल, विशेषकर भाजपा, घबरा गई थी।
पांच महीने पुराने वारंट का इस्तेमाल
वीणा मानवी ने अपनी गिरफ्तारी और नामांकन प्रक्रिया में आई बाधाओं को लेकर प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने बताया कि जिस गिरफ्तारी वारंट का हवाला देकर उन्हें रोका गया, वह करीब पांच महीने पुराना था। उन्होंने तर्क दिया कि यदि यह वारंट वास्तव में प्रभावी था, तो पुलिस ने पिछले कई महीनों के दौरान उन पर कार्रवाई क्यों नहीं की, जबकि वह इस बीच लगातार सार्वजनिक कार्यक्रमों और चुनाव प्रचार में सक्रिय रही थीं।
मानवी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस दौरान वह कई बार गांधी मैदान थाने भी गई थीं, लेकिन उस समय पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार करने का कोई प्रयास नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि नामांकन दाखिल करने के दिन ही अचानक इस वारंट को सक्रिय करना पूरी तरह से पूर्व-नियोजित था ताकि उन्हें चुनाव लड़ने से वंचित रखा जा सके।
भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस में वीणा मानवी ने सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि बांकीपुर सीट भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बनी हुई है और उनकी उम्मीदवारी से वहां के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल रहे थे। मानवी का दावा है कि भाजपा को अपनी हार का डर सता रहा था, जिसके चलते उन्हें षड्यंत्र के तहत रास्ते से हटाने का प्रयास किया गया।
उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का नाम लेते हुए कहा कि एक महिला प्रत्याशी को रोकने के लिए जिस तरह के हथकंडे अपनाए गए, वह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने इस पूरी घटना को सत्ता के दुरुपयोग का एक उदाहरण बताया और कहा कि यदि निष्पक्षता कायम रहती, तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
निष्पक्ष जांच की मांग
वीणा मानवी ने जिला प्रशासन के अधिकारियों की भूमिका पर भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे घटनाक्रम की एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए राजनीतिक दबाव में आकर यह कार्रवाई की है, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए।
उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कार्यप्रणाली का जिक्र करते हुए कहा कि यदि शासन में पहले जैसी संवेदनशीलता होती, तो किसी भी प्रत्याशी के साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया जाता। मानवी ने अंत में दोहराया कि वह इस अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज उठाती रहेंगी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली इन शक्तियों का पर्दाफाश करेंगी।
फिलहाल इस मामले ने पटना की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। प्रशासन की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन वीणा मानवी के बयानों ने उपचुनाव की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि क्या इस मामले में कोई उच्च स्तरीय जांच बैठाई जाती है या यह मुद्दा केवल राजनीतिक बयानबाजी तक ही सीमित रह जाता है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
