अयोध्या: सरकारी जमीन से कब्जा हटाने के लिए 63 बार लगाई गुहार, समाधान दिवस में फरियादी की आपबीती
अयोध्या की सभी तहसीलों में शनिवार को संपूर्ण समाधान दिवस आयोजित हुआ। संबंधित विभागों को शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण करने के निर्देश दिए गए।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

समाधान दिवस में प्रशासनिक दावों की खुली पोल
अयोध्या की तहसीलों में शनिवार को आयोजित 'संपूर्ण समाधान दिवस' के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया जिसने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मिल्कीपुर तहसील में एक फरियादी ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि वह पिछले चार वर्षों से सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटवाने के लिए दर-दर भटक रहा है, लेकिन उसे सिर्फ कोरे आश्वासन ही मिले हैं।
कुमारगंज थाना क्षेत्र के तेंधा गांव निवासी मोहनलाल गुप्ता ने अधिकारियों को बताया कि पालपुर ग्राम पंचायत की गाटा संख्या 1272 पर लंबे समय से अवैध कब्जा जमा हुआ है। यह जमीन सरकारी सीलिंग की श्रेणी में आती है। मोहनलाल का दावा है कि इस जमीन को कब्जामुक्त कराने के लिए उन्होंने वर्ष 2021 से अब तक कुल 63 बार संपूर्ण समाधान दिवस में लिखित शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
कागजों में सिमटी जांच और पैमाइश
फरियादी का आरोप है कि हर बार शिकायत करने पर राजस्व विभाग की ओर से जांच और पैमाइश का आश्वासन दिया जाता है। कई बार मौके पर टीम भी पहुंची, लेकिन कब्जा हटाने के नाम पर खानापूर्ति कर दी गई। मोहनलाल के अनुसार, जिलाधिकारी स्तर से मौखिक निर्देश मिलने के बावजूद स्थानीय राजस्व कर्मियों ने प्रभावी कदम नहीं उठाए, जिससे अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं।
मोहनलाल ने प्रशासन पर लापरवाही बरतने और अतिक्रमणकारियों के साथ मिलीभगत का भी सीधा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि उनकी शिकायतों की फाइलें केवल दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं, जबकि सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जा बरकरार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कागजी कार्रवाई और वास्तविक स्थिति में जमीन-आसमान का अंतर है।
अब मुख्यमंत्री दरबार का रुख करेंगे फरियादी
लगातार 63 बार की असफल कोशिशों के बाद मोहनलाल अब हार मानने के मूड में नहीं हैं। उन्होंने निर्णय लिया है कि वह अपनी सभी 63 शिकायतों की प्रतियों के साथ लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री के जनता दरबार में जाएंगे। उनका मानना है कि स्थानीय स्तर पर सुनवाई न होने के कारण अब उन्हें उच्च स्तर पर ही न्याय की उम्मीद बची है।
शनिवार को मिल्कीपुर के अलावा रुदौली और सोहावल तहसीलों में भी जनसुनवाई का आयोजन किया गया। मिल्कीपुर में मुख्य राजस्व अधिकारी गजेंद्र कुमार, एसडीएम पवन कुमार शर्मा और तहसीलदार राजीव वर्मा ने फरियादियों की समस्याएं सुनीं। इसी तरह अन्य तहसीलों में भी संबंधित अधिकारियों ने शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश दिए, लेकिन मोहनलाल का मामला यह बताने के लिए काफी है कि निर्देशों का पालन जमीनी स्तर पर कितना हो रहा है।
प्रशासनिक अधिकारियों ने इस मामले में संज्ञान लेने की बात कही है, लेकिन सवाल यह है कि 63 बार की शिकायतों के बाद भी कार्रवाई क्यों लंबित रही? फिलहाल, यह मामला अयोध्या प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, जहां एक आम नागरिक सरकारी जमीन को बचाने के लिए वर्षों से संघर्ष कर रहा है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!