अनूपपुर रेलवे फ्लाईओवर का रास्ता साफ: वन और रेलवे विभाग से मिली जमीन, 31 दिसंबर तक पूरा होगा निर्माण
Anuppur railway flyover project land dispute resolved, construction to be completed by December 31. अनूपपुर रेलवे फाटक पर निर्माणाधीन फ्लाईओवर ब्रिज में जमीन से जुड़ा विवाद सुलझ गया है। रेलवे और वन विभाग के बीच लंबे समय से अटका यह मामला हल होने से अब निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

अटकलों पर लगा विराम, जमीन विवाद सुलझा
अनूपपुर रेलवे फाटक पर लंबे समय से निर्माणाधीन फ्लाईओवर ब्रिज के लिए एक बड़ी बाधा दूर हो गई है। रेलवे और वन विभाग के बीच जमीन को लेकर चल रहा विवाद अब सुलझ गया है, जिससे निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद जगी है। इस विवाद के कारण परियोजना का काम काफी समय से प्रभावित था, लेकिन अब विभाग द्वारा जमीन उपलब्ध कराए जाने के बाद निर्माण कार्य को गति मिल सकेगी।
सेतु निगम की सीई सरस्वती त्रिपाठी ने स्पष्ट किया है कि अब निर्माण कार्य में किसी प्रकार की अड़चन नहीं है। वन विभाग की दीवार को हटाने और रेलवे द्वारा चिन्हित मकानों के संबंध में सहमति मिलने के बाद अब रिटेनिंग वॉल और सर्विस रोड का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। हालांकि, बारिश के मौसम के बावजूद निर्माण कार्य जारी है, ताकि तय समय सीमा के भीतर इसे पूरा किया जा सके।
दीपावली का लक्ष्य टला, अब 31 दिसंबर की नई डेडलाइन
फ्लाईओवर के पूरा होने को लेकर पहले दीपावली तक का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब इसे संशोधित कर 31 दिसंबर 2026 कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जमीन आवंटन में हुई देरी के कारण परियोजना का काम करीब तीन साल पिछड़ गया है। इस देरी की भरपाई के लिए अब निर्माण की गति को बढ़ाया जा रहा है ताकि साल के अंत तक इसे जनता के लिए खोला जा सके।
वर्तमान स्थिति के अनुसार, अस्पताल की ओर लगभग 118 मीटर रिटेनिंग वॉल का काम शेष है। वहीं, कोतवाली तिराहे की तरफ 130 मीटर दीवार का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन उसमें फीलिंग और ढलाई का काम अभी भी अधूरा है। इन कार्यों को पूरा करने के लिए अब संसाधनों को जुटाया जा रहा है।
परियोजना की लागत में भारी इजाफा
अनूपपुर जिला मुख्यालय में रेलवे फाटक की समस्या से निजात दिलाने के लिए शुरू की गई यह परियोजना आठ साल पहले महज 12 करोड़ रुपये के बजट के साथ शुरू हुई थी। उस समय इसे 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि, प्रशासनिक देरी और जमीन संबंधी विवादों के कारण परियोजना की लागत अब बढ़कर 20 करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है।
लगातार हो रही देरी का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। रेलवे लाइन के एक छोर से दूसरे छोर तक जाने के लिए लोगों को अभी भी अंडरब्रिज का सहारा लेना पड़ रहा है, जो काफी लंबा रास्ता है। स्थानीय निवासियों को हर बार दो से तीन किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर काटना पड़ता है, जिससे मरीजों, स्कूली छात्रों और दैनिक यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
आने वाले दिनों में निर्माण की स्थिति
आगामी महीनों में निर्माण कार्य की गति पर सभी की नजरें टिकी हैं। प्रशासन का दावा है कि जमीन मिलने के बाद अब किसी भी प्रकार की तकनीकी बाधा नहीं है। रिटेनिंग वॉल और सर्विस रोड का निर्माण पूरा होते ही यातायात के लिए मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। स्थानीय लोग अब उम्मीद कर रहे हैं कि 31 दिसंबर की नई समय सीमा का सख्ती से पालन किया जाएगा ताकि वर्षों से चली आ रही इस समस्या का स्थायी समाधान हो सके।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
