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अम्बाला बिजली अदालत: गलत मीटर जुड़ने से बीपीएल कार्ड हुआ रद्द, 5 महीने से चक्कर काट रहा पीड़ित

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

15 सितंबर 20263 मिनट पढ़ें
अम्बाला बिजली अदालत: गलत मीटर जुड़ने से बीपीएल कार्ड हुआ रद्द, 5 महीने से चक्कर काट रहा पीड़ित
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अम्बाला के अग्रसेन चौक स्थित उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएन) कार्यालय में हाल ही में एक बिजली अदालत का आयोजन किया गया। इस अदालत का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं की समस्याओं का त्वरित समाधान करना था, लेकिन वहां पहुंची शिकायतों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कई उपभोक्ता अपनी ऐसी समस्याओं को लेकर पहुंचे जिनका समाधान निचले स्तर के कार्यालयों में ही संभव था, लेकिन लंबे समय से सुनवाई न होने के कारण उन्हें उच्च अधिकारियों के पास आना पड़ा।

गलत मीटर जुड़ने से बीपीएल कार्ड पर संकट

बिजली अदालत में सामने आई सबसे गंभीर समस्या गांव चुगना के निवासी सुखपाल की रही। सुखपाल ने शिकायत दर्ज कराई कि उनके बिजली खाते के साथ किसी अन्य उपभोक्ता का मीटर गलती से जोड़ दिया गया है। इस तकनीकी गड़बड़ी का खामियाजा उन्हें अपने बीपीएल राशन कार्ड के रूप में भुगतना पड़ा। गलत डेटा फीडिंग के कारण उनका बीपीएल कार्ड ही कट गया, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना बंद हो गया है।

पीड़ित उपभोक्ता का कहना है कि वह पिछले पांच महीनों से अपने खाते से दूसरे व्यक्ति का मीटर हटवाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। इस मामले पर एसडीओ गौतम ने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह समस्या उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है और इसका समाधान एडीसी कार्यालय के स्तर से ही संभव है।

सोलर पैनल के बावजूद भारी-भरकम बिल

बिजली अदालत में केवल मीटर गड़बड़ी ही नहीं, बल्कि बिलिंग से जुड़ी अन्य शिकायतें भी बड़ी संख्या में पहुंचीं। सेक्टर-9 के निवासी रोहित सोनी ने शिकायत की कि उन्होंने अपने घर पर सोलर पैनल लगवा रखा है, इसके बावजूद उन्हें पिछले महीने 10 हजार रुपये का बिजली बिल थमा दिया गया। सोलर सिस्टम होने के बाद भी इतना अधिक बिल आना विभाग की बिलिंग प्रणाली में बड़ी खामी को दर्शाता है।

इसी तरह, मानकपुर गांव के एक अन्य उपभोक्ता ने ट्यूबवेल कनेक्शन के बिल को लेकर अपनी व्यथा सुनाई। उनका बिल 17 हजार रुपये आया है, जिसे भरने में असमर्थता जताते हुए उन्होंने विभाग से बिल का भुगतान किस्तों में करने की अनुमति मांगी है। इन शिकायतों ने स्पष्ट कर दिया है कि उपभोक्ता बिजली विभाग की वर्तमान व्यवस्था से खासे परेशान हैं।

प्रशासनिक उदासीनता और उपभोक्ताओं की परेशानी

बिजली अदालत में जिस तरह की शिकायतें सामने आई हैं, वे विभाग के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को उजागर करती हैं। एक छोटी सी तकनीकी गलती के कारण किसी गरीब परिवार का बीपीएल कार्ड कट जाना और पांच महीने तक समाधान न मिल पाना प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण है। उपभोक्ता अपनी समस्याओं के समाधान के लिए एक्सईएन और एसडीओ कार्यालयों के बीच भटकने को मजबूर हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बिजली विभाग अपने डेटाबेस को समय-समय पर अपडेट करे और उपभोक्ताओं की शिकायतों को गंभीरता से ले, तो इस तरह की नौबत नहीं आएगी। फिलहाल, पीड़ित उपभोक्ता अब भी अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि बिजली अदालत के बाद उनके मामलों में कोई ठोस कार्रवाई की जाएगी।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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